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वो हंसके मिले, हम प्यार समझ बैठे!
आज 1966 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बहारें फिर भी आएंगी’ का एक गीत याद आ रहा है। यह गीत- ओ.पी.नैय्यर जी के संगीत निर्देशन में आशा भौंसले जी ने गाया था। इस गीत के लेखक थे- श्री एस. एच. बिहारी जी। यह गीत लंबे समय तक बिनाका गीतमाला का टॉप गीत बना रहा था। वास्तव…
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Books for Listening!
The point for today’s submission is whether books that we read are more effective or the books that we listen. This did not and can’t come to my mind, since I have never considered books to be something that should be listened. I am discussing it based on an IndiSpire prompt for this weekend. Yes…
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Long live our Great Republic
We just celebrated the 70th Republic Day of our great country India. Our Republic became 69 yrs old on 26th January, 2019. Our great leaders had made untiring efforts, sacrifices and as a result we became a free nation on 15th August, 1947 and after prolonged discussions we developed our great constitution and adopted it…
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40. मालूम क्या किसी को, दर्द-ए-निहां हमारा!
सभी मित्रों को भारतीय गणतंत्र दिवस की बधाई देते हुए, आज फिर से यादों की पुरानी संदूकची खोल रहा हूँ, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! पता नहीं क्या सोचकर यह ब्लॉग लिखने की शुरुआत की थी। और इसको शेयर करता हूँ ट्विटर पर, फेसबुक पर! जैसे गब्बर सिंह ने सवाल पूछा था, क्या…
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बादल और लहरें – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘क्लॉउड्स एंड वेव्स’ का भावानुवाद-…
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व्यापारी- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘दा मर्चेंट’ का भावानुवाद- …
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जब दो बहनें (कुएं से) पानी भरने जाती हैं- टैगोर
आज भी मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित एक कविता का भावानुवाद है, जिसे अनुवाद के बाद मूल रूप में प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘व्हेन टू…
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यह श्वान – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार विजेता तथा हमारे राष्ट्रगान के रचयिता कवि- गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित एक कविता का भावानुवाद है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया उनकी कविता ‘दिस डॉग’ का भावानुवाद- गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की…
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वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया!
आज जगजीत सिंह जी की गाई हुई एक बहुत सुंदर गज़ल याद आ रही है। इसे 1982 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘साथ साथ’ के लिए के कुलदीप सिंह जी के संगीत निर्देशन में तैयार किया गया था। इस गज़ल के लेखक हैं– ज़नाब जावेद अख्तर जी। कई बार इस गज़ल के अलग-अलग शेर, अलग-अलग संदर्भों…
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Caring for self and not disturbing others!
Again this is time for weekly post based on WOW prompt. Firstly it appeared that I was going to miss it this time but then came the idea! Yes this time we had to look into our cupboard, drawer, closet etc. and had to write based on the things we observe there. Yes we keep…