Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 10th Jul 2019

    66. न था रक़ीब तो आखिर वो नाम किसका था!

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग- आज कुछ गज़लें, कवितायें जो याद आ रही हैं, उनके बहाने बात करूंगा।     एक मेरे दिल्ली पब्लिक लायब्रेरी की शनिवारी सभा के साथी थे- राना सहरी, जो उस समय लिखना शुरू कर रहे थे, बाद में उनकी लिखी…

  • 9th Jul 2019

    उसने यह निर्णय क्यों लिया – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 8th Jul 2019

    अरी ओ एलेक्सा!

    अज्ञेय जी की एक पुरानी काव्य-पंक्ति याद आ रही है, जिसमें उन्होंने आत्मा के बारे में उन्होंने लिखा था- अरी ओ आत्मा री, भोली कन्या क्वांरी,  महाशून्य के साथ भांवरें तेरी रची गईं। इस कविता में कवि ने अदृश्य आत्मा के अदृश्य परमात्मा के साथ संबंध पर टिप्पणी की गई थी। हम शुरू से ही अदृश्य…

  • 7th Jul 2019

    सभा कालवश तोर!

    राजनीति में सरकारें बनती रहती हैं, कभी एक पार्टी सत्ता में आती है कभी दूसरी, लेकिन कांग्रेस की आज की स्थिति को देखकर महाभारत और रामायण के प्रसंग याद आते हैं। इन दोनों महाग्रंथों में जो दिखाया गया है, प्रत्येक में एक अत्यंत शक्तिशाली वंश का नाश होता है और उसके मूल में होता है…

  • 6th Jul 2019

    हरियाली के ऊपर- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 5th Jul 2019

    थकी दोपहरी जैसी मां !

    आज निदा फाज़ली साहब को याद करने का मन हो रहा है। समकालीन उर्दू शायरी में निदा साहब का अपना एक अलग ही स्थान है। बहुत सादगी के साथ जितनी बड़ी बात वो कह देते थे, वह आसान नहीं होता। मैंने पहले भी उनकी बहुत सी रचनाएं शेयर की हैं, ‘बच्चा स्कूल जा रहा है’,…

  • 4th Jul 2019

    कुछ मैं कहूं, कुछ तुम कहो!

    अक्सर मुझे हिंदी कवि सम्मेलनों के वे दिन याद आते हैं, जब मंचों से अनेक रचनाधर्मी कवि काव्य-पाठ किया करते थे। मंचों पर हिंदी गीत जमकर सुने जाते थे, कवि सम्मेलन और मुशायरे लाल-किले से लेकर छोट-छोटे कस्बों तक, कितने ही रचनाधर्मी कवि थे- बच्चन जी, दिनकर जी, नीरज जी से लेकर रमानाथ अवस्थी जी,…

  • 3rd Jul 2019

    मुक्त कर दो मुझे – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 2nd Jul 2019

    65. चंदू के चाचा, चांद पर !

    आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग, इस ब्लॉग में थोड़ी सी कल्पना कथा, एक राजनैतिक चरित्र को ध्यान में रखते हुए लिखी है, इसे व्यंग्य कह सकते हैं। जब लिखा था तब वह चरित्र जेल से बाहर था, अभी अंदर है। लीजिए प्रस्तुत है यह ब्लॉग…

  • 1st Jul 2019

    भंवरा तुम्हारी हंसी न उड़ाये!

    पिछली बार जो युगल गीत शेयर किया था, बिना कारण नायिका की फिक्र करने वाले दीवाने नायक का, खुदाई खिदमदगार का, कुछ उसी तरह का गीत आज याद आ रहा है। इस गीत को मुकेश जी के साथ लता जी ने गाया है, फिल्म है- 1961 में रिलीज़ हुई- नज़राना, इसमें भी नायक तो राजकपूर…

←Previous Page
1 … 1,309 1,310 1,311 1,312 1,313 … 1,375
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
 

Loading Comments...
 

    • Subscribe Subscribed
      • SamaySakshi
      • Join 1,143 other subscribers.
      • Already have a WordPress.com account? Log in now.
      • SamaySakshi
      • Subscribe Subscribed
      • Sign up
      • Log in
      • Report this content
      • View site in Reader
      • Manage subscriptions
      • Collapse this bar