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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 1st Feb 2022

    मेरे हाथ में छालों की तरह!

    और तो मुझ को मिला क्या मेरी मेहनत का सिला,चंद सिक्के हैं मेरे हाथ में छालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 1st Feb 2022

    सुलगते हैं सवालों की तरह!

    मुझसे नजरे तो मिलाओ कि हजारों चेहरे,मेरी आंखों में सुलगते हैं सवालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 1st Feb 2022

    दिल में कुछ दर्द चमकते हैं!

    हम से मायूस न हो ऐ शब-ए-दौराँ कि अभी,दिल में कुछ दर्द चमकते हैं उजालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 1st Feb 2022

    मैं कल रात नहीं रोया था!

    आज एक बार फिर से मैं किसी ज़माने में अपने मधुर गीतों के द्वारा श्रोताओं को मंत्रमुग्ध करने वाले, अपनी रचना ‘मधुशाला’ के कारण विशेष ख्याति प्राप्त हिन्दी कवि और अमिताभ बच्चन जी के पूज्य पिताश्री स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| सरल भाषा में गहन बात कहना बच्चन…

  • 31st Jan 2022

    तेरे अबरू तेरे लब!

    तेरी ज़ुल्फ़ें तेरी आँखें तेरे अबरू तेरे लब,अब भी मशहूर हैं दुनिया में मिसालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 31st Jan 2022

    महकते हैं शिवालों की तरह!

    गुनगुनाते हुए और आ कभी उन सीनों में,तेरी खातिर जो महकते हैं शिवालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 31st Jan 2022

    तेरे गालों की तरह!

    और क्या उसमें जियादा कोई नर्मी बरतूं,दिल के जख्मों को छुआ है तेरे गालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 31st Jan 2022

    जहर के प्यालों की तरह!

    तेरे बिन, रात के हाथों पे ये तारों के अयाग,खूबसूरत हैं मगर जहर के प्यालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 31st Jan 2022

    नींद-सी आंखों में घुली जाती है!

    खुद-ब-खुद नींद-सी आंखों में घुली जाती है,महकी-महकी है शब-ए-गम तेरे बालों की तरह| जां निसार अख़्तर

  • 31st Jan 2022

    हमसे भागा न करो, दूर!

    हमसे भागा न करो, दूर ग़ज़ालों की तरह,हमने चाहा है तुम्हें चाहने वालों की तरह| जाँ निसार अख़्तर

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