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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Feb 2022

    तू इन्तज़ार कर शायद!

    जो भी बिछड़े हैं कब मिले हैं “फ़राज़”,फिर भी तू इन्तज़ार कर शायद| अहमद फ़राज़

  • 5th Feb 2022

    याद-ए -याराने-बेख़बर शायद!

    जिंदगी भर लहू रुलाएगी,याद-ए -याराने-बेख़बर शायद| अहमद फ़राज़

  • 5th Feb 2022

    तेरी नज़र शायद!

    अजनबीयत की धुंध छंट जाए,चमक उठे तेरी नज़र शायद| अहमद फ़राज़

  • 5th Feb 2022

    और हमसफ़र शायद!

    जिनके हम मुन्तज़िर रहे उनको,मिल गये और हमसफ़र शायद| अहमद फ़राज़

  • 5th Feb 2022

    ऐ दोस्त ग़ौर कर शायद!

    जान पहचान से ही क्या होगा,फिर भी ऐ दोस्त ग़ौर कर शायद| अहमद फ़राज़

  • 5th Feb 2022

    मिल सकें मगर शायद!

    फिर उसी रहगुज़ार पर शायद,हम कभी मिल सकें मगर शायद| अहमद फ़राज़

  • 5th Feb 2022

    अब तुम्हारा प्यार भी!

    हिन्दी काव्य जगत में गीतों के राज कुँवर के नाम से विख्यात स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ, जिन्होंने न केवल कवि सम्मेलनों में श्रोताओं को अपने गीतों पर झूमने के लिए मज़बूर किया अपितु हिन्दी फिल्मों में भी कुछ लाजवाब गीतों के माध्यम से अपना अमूल्य…

  • 4th Feb 2022

    हाथ हिलाए भी, घबराये भी!

    आने वाली रुत का कितना खौफ है उसकी आंखों में,जाने वाला दूर से हाथ हिलाए भी, घबराये भी| मोहसिन नक़वी

  • 4th Feb 2022

    मुझे समझाये भी घबराये भी!

    कौन बिछड़कर फिर लौटेगा, क्यों आवारा फिरते हो,रातों को एक चांद मुझे समझाये भी घबराये भी| मोहसिन नक़वी

  • 4th Feb 2022

    गुमसुम लड़की राहों में!

    रात गए घर जाने वाली गुमसुम लड़की राहों में,अपनी उलझी जुल्फों को सुलझाए भी घबराये भी| मोहसिन नक़वी

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