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स्रोत- गुरुदेव रवींद्रनाथ ठाकुर की कविता
आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…
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नींद कहाँ सीने पे कोई, भारी कदमों से चलता है!
आज फिर से अपने परम प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक अलग तरह का गीत शेयर कर रहा हूँ। सुकवि शैलेंद्र जी के लिखे इस गीत को मुकेश जी ने शंकर जयकिशन की प्रसिद्ध जोड़ी के संगीत निर्देशन में फिल्म- बेगुनाह के लिए गाया था और इसे राजेश खन्ना जी पर फिल्माया गया था।…
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Paying fine in money or with Life!
Again discussing on an # IndiSpire prompt. The issue is whether the fines recently made applicable by the Indian government for traffic violations are justifiable or not! The very first thing to be noted is that the purpose of making such rules is not earning revenue for the government. As I understand the…
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वापस अपने हिंदुस्तान!
डेढ़ माह के प्रवास के बाद लंदन से वापस चले और बंगलौर में आकर टपक गए। एयर इंडिया से ही हमने दोनो तरफ की यात्रा की। एक बात कहने का मन हो रहा ‘एयर इंडिया’ के बारे में, अपनी सरकारी एयरलाइन है, इसमें जो परिचारिकाएं हमारी सेवा के लिए उपस्थित होती हैं, उनकी उम्र देखते…
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सोच समझ वालों को थोड़ी नादानी दे मौला!
आज फिर से पुराने ब्लॉग का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है ये पुरानी ब्लॉग पोस्ट- इंटरनेट पर ज्ञान देने वाले तो भरे पड़े हैं, मैं तो अज्ञान का ही पक्षधर हूँ। जो व्यक्ति आज भी दिमाग के स्थान पर दिल पर अधिकतम भरोसा करते हैं, उनमें कवि-शायर काफी बड़ी संख्या में आते हैं। वहाँ भी…
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लंदन फिर से छूटा जाय!
यह आलेख भी मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इसको थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। डेढ़ महीने के प्रवास के बाद कल सुबह लंदन छोड़ देंगे। कल दोपहर की फ्लाइट यहाँ से है, सो सुबह ही घर छोड़ देंगे, हाँ उस समय जब भारत में दोपहर…
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कश्ती के मुसाफिर ने समुंदर नहीं देखा!
आज फिर से एक गज़ल शेयर करने का मन है। ये गज़ल है ज़नाब डॉ. बशीर बद्र जी की, जो वर्तमान उर्दू शायरों में एक अलग अंदाज़ के लिए जाने जाते हैं, गज़ल में बहुत से एक्सपेरीमेंट किए हैं डॉ. बशीर बद्र जी ने। यह गज़ल भी एक अलग तरह की है और कुछ शेर…
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लंदन की खुरचन!
यह आलेख भी मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इसको थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। शीर्षक पढ़कर आप सोच सकते हैं कि मैं किस डिश, किस व्यंजन की बात कर रहा हूँ और क्या ऐसी कोई डिश भी लंदन की विशेषता है! दरअसल मुझे तो किसी…
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ये लंदन-वो दिल्ली!
यह आलेख मैंने पिछले वर्ष लंदन छोड़ने से पहले लिखा था, अब इस वर्ष फिर से वही घटना हो रही है तो थोड़ा बहुत एडिट करके फिर से प्रस्तुत कर रहा हूँ। पिछले वर्ष एक महीना रुका था, 6 जून से 6 जुलाई तक, इस बार प्रवास डेढ़ महीने का है, 6 अगस्त से 20…
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लंदन में शॉपिंग का एक और दिन!
इस वर्ष के लंदन प्रवास का आज अंतिम रविवार था। यह तो निश्चित ही है कि विज़िट करने और कराने वालों में महिलाएं भी हों तो कुछ समय तो शॉपिंग को भी देना ही पड़ता है। वैसे एक-दो बार छिटपुट शॉपिंग पहले भी हो चुकी है, एक दिन तो ‘ओ-2’ में ही लंच और उसके…