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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 15th Mar 2020

    ज़िंदगी तुझको तो, बस ख़्वाब में देखा हमने!

    आज एक प्रसिद्ध गज़ल को शेयर कर रहा हूँ, जिसे शहरयार जी ने लिखा था औरऔर इसको 1981 में रिलीज़ हुई फिल्म- उमराव जान के लिए, आशा भौंसले जी ने खय्याम जी के संगीत निर्देशन में गाया था। यह खूबसूरत गज़ल एक तरह से जीवन फिलासफी को बताती है। ज़िंदगी को बहुत सी कविताओं में,…

  • 14th Mar 2020

    धैर्य – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 13th Mar 2020

    ये दिया कैसे जलता हुआ रह गया!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     आज वसीम बरेलवी साहब की एक गज़ल याद आ रही है, बस उसके शेर एक-एक करके शेयर कर लेता हूँ। बड़ी सादगी के साथ बड़ी सुंदर बातें की हैं, वसीम साहब ने इस गज़ल में। पहला शेर तो वैसा ही है, जैसा…

  • 12th Mar 2020

    पधारो महाराज!

    देश की और विशेष रूप से मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव हुआ है। लंबे समय तक कांग्रेस में राहुल गांधी के निकटतम साथी रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने लंबे समय तक उपेक्षा सहने के बाद कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा में शामिल हो गए।     पहले भी कांग्रेस के वर्तमान शाही परिवार…

  • 11th Mar 2020

    हाय रे अकेले छोड़ के जाना, और न आना बचपन का!

    आज मुझे अपने परम प्रिय गायक जी का गाया, फिल्म देवर का एक गीत याद आ रहा है, जो अभिनेता धर्मेंद्र जी पर फिल्माया गया था। इस गीत को लिखा था आनंद बख्शी जी ने और रोशन जी के संगीत निर्देशन में मुकेश जी ने अपने मधुर स्वर में इस गीत को गाकर अमर कर…

  • 10th Mar 2020

    संडे के दिन रास रचा जाइयो, बुला गई राधा प्यारी!

    एक बार फिर से मैं, होली के पावन अवसर पर, सभी को हार्दिक शुभकामनाएं देता हूँ, स्व. अल्हड़ बीकानेरी जी की लिखी इस आधुनिक रसिया के साथ-   कान्हा बरसाने में आ जइयो, बुला गई राधा प्यारी। असली माखन कहाँ मिलैगो, शॉर्टेज है भारी, चर्बी वारौ बटर मिलैगो, फ्रिज में हे बनवारी, आधी चम्मच मुख…

  • 9th Mar 2020

    अंतरतम में स्थित वह – रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 8th Mar 2020

    अपनी छोटी-सी ज़मीन पर , अपनी उगा फसल!

    आज स्व. रमेश रंजक जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ। इस गीत में रंजक जी ने नए कवियों को संबोधित करते हुए यह संदेश दिया है कि वे मौलिकता पर पूरा ध्यान दें। अक्सर यह होता है कि लोग तेजी से आगे बढ़ने के लिए दूसरों की नकल करने लगते हैं, बहुत से…

  • 7th Mar 2020

    Opposition turning irrelevant in India!

    I normally avoid discussing about politics. It appears that there is nothing serious to discuss about today’s politicians, in India. In fact when I think of our politicians, specially those in opposition today, it appears that Mr. Modi   has turned them into a big zero.     Sometimes I feel that some film personalities, like…

  • 6th Mar 2020

    जब राजा फँसता दिखे पैदल दे पिटवाय!

    आज मैं हिंदी गीतों के राजकुंवर, स्व. गोपाल दास ‘नीरज’ जी के लिखे कुछ दोहे शेयर कर रहा हूँ, जैसे गज़ल के शेरों में संक्षेप में बड़ी बात कही जाती है, दोहे भी बहुत लंबे समय से, थोड़े में अधिक बात कहने के लिए प्रयोग किए जाते रहे हैं, तुलसीदास जी के और उनसे भी…

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