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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th May 2020

    पेट की पगडंडियों के जाल से आगे!

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ-     आज क़तील शिफाई जी की एक गज़ल याद आ रही है, क्या निराला अंदाज़ है बात कहने का! शायर महोदय, जिनकी नींद उड़ गई है परेशानियों के कारण, वो रात भर जागते हैं, आसमान की तरफ देखते रहते हैं और उनको लगता…

  • 29th May 2020

    कोरोना काल के फरिश्ते!

    आज एक बार फिर से कोरोना संकट और लॉक डाउन की परिस्थितियों के बहाने चर्चा कर रहा हूँ|   ऐसे राष्ट्रीय संकट के समय भी राजनीति और फिल्म जगत, व्यावहारिक रूप से हर क्षेत्र के लोगों का अलग-अलग चरित्र उजागर होता है| हमारी प्रमुख राष्ट्रीय विपक्षी पार्टी और लंबे समय तक सत्तारूढ़ रही पार्टी- कांग्रेस…

  • 28th May 2020

    क़ीमत नहीं चुकाई गइ इक ग़रीब से!

    आज फिल्म- ‘एक महल हो सपनों का’ से किशोर कुमार साहब का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| 1975 में रिलीज़ हुई इस फिल्म का यह गीत लिखा है- साहिर लुधियानवी जी ने और इसके लिए संगीत दिया था- रवि जी ने| वास्तव में कविता और गीत ज़िंदगी के खट्टे-मीठे अनुभवों के आधार पर…

  • 27th May 2020

    ऐसा भी तो अंगार नहीं मिलता है – गोपाल दास ‘नीरज’

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी अपने जमाने में कवि सम्मेलनों का मुख्य आकर्षण हुआ करते थे| हिन्दी फिल्मों में भी नीरज जी ने बहुत प्यारे गीत दिए हैं| लीजिए आज नीरज जी के इस गीत का…

  • 26th May 2020

    कोरोना संकट- जनता, सरकार और विपक्ष!

    आज एक बार फिर से मैं कोरोना संकट और लॉक डाउन के अनुभव के बारे में बात कर रहा हूँ| मैं वैसे पणजी, गोवा में रहता हूँ लेकिन लॉक-डाउन की पूरी अवधि बंगलौर में गुज़री है| लगे हाथ यहाँ के एक विशेष अनुभव का भी ज़िक्र कर दूँ| बंगलौर के हेगड़े नगर में एक विशाल…

  • 25th May 2020

    जीवन प्रवाह- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

  • 24th May 2020

    ये क्या हो रहा है ये क्यों हो रहा है- अकबर इलाहाबादी

    आज अकबर इलाहाबादी साहब की एक छोटी सी रचना शेयर कर रहा हूँ| अकबर इलाहाबाद साहब ने हल्की-फुलकी और गंभीर, दोनों प्रकार की रचनाएँ लिखी हैं, नेताओं के बारे में भी और मशहूर गजल, ‘हंगामा है क्यों बरपा’ भी अकबर इलाहाबादी साहब ने ही लिखी थी| लीजिए आज इस कविता का आनंद लीजिए-    …

  • 23rd May 2020

    प्रेमा नदी – सोम ठाकुर

    आज मैं एक बार फिर से अपने प्रिय कवियों में से एक माननीय श्री सोम ठाकुर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| यह एक अलग तरह की कविता है जो अपना संपूर्ण प्रभाव पाठक/श्रोता पर छोड़ती है| लीजिए इस कविता का आनंद लीजिए-       मैं कभी गिरता – संभलता हूँ उछलता…

  • 22nd May 2020

    जिसकी तमन्ना में फिरता हूँ बेक़रार!

    आज मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का एक अत्यंत मधुर गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे मुकेश जी और लता जी ने 1974 में रिलीज़ हुई फिल्म – फिर कब मिलोगी के लिए गाया था और इस गीत में प्रत्येक पंक्ति के बाद जो गूंज रह जाती है, वह विशेष प्रभाव छोड़ती है| मजरूह…

  • 21st May 2020

    दूर ले चलो नाव- रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…

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