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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Mar 2022

    दो घूँट पानी पिलाना!

    नदी की कहानी कभी फिर सुनाना,मैं प्यासा हूँ दो घूँट पानी पिलाना। कन्हैयालाल नंदन

  • 25th Mar 2022

    उजाले की खुशबू

    एक बार फिर से मैं कवि सम्मेलनों में अपने गीतों के माध्यम से श्रोताओं के मन में अपनी अमिट छाप बनाने वाले सृजनधर्मी गीतकार श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| सोम जी ने अपने गीतों में अभिव्यक्ति की बहुत मंज़िलें पार की हैं, सरल भाषा में अक्सर बहुत गहरी बात…

  • 24th Mar 2022

    कपड़े फाड़े, शोर किया!

    जब-जब मौसम झूमा हमने कपड़े फाड़े, शोर किया,हर मौसम शाइस्ता रहना कोरी दुनियादारी है| निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    कुछ अपनी अय्यारी है!

    औरों जैसे होकर भी हम बाइज़्ज़त हैं बस्ती में,कुछ लोगों का सीधापन है, कुछ अपनी अय्यारी है| निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    बहुत बड़ी फ़नकारी है!

    मन बैरागी, तन अनुरागी, क़दम-क़दम दुश्वारी है,जीवन जीना सहल न जानो, बहुत बड़ी फ़नकारी है| निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    अपनी उड़ान में रखना!

    चमकते चाँद-सितारों का क्या भरोसा है,ज़मीं की धूल भी अपनी उड़ान में रखना | निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    उसे आसमान में रखना!

    वो ख्वाब जो चेहरा कभी नहीं बनता,बना के चाँद उसे आसमान में रखना | निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    अपने बयान में रखना!

    जो देखती हैं निगाहें वही नहीं सब कुछ,ये एहतियात भी अपने बयान में रखना | निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    उसे भी मकान में रखना!

    जो साथ है वही घर का नसीब है लेकिन,जो खो गया उसे भी मकान में रखना | निदा फ़ाज़ली

  • 24th Mar 2022

    मंज़िल गुमान में रखना!

    सफ़र को जब भी किसी दास्तान में रखना,क़दम यकीन में, मंज़िल गुमान में रखना | निदा फ़ाज़ली

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