Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 7th Mar 2021

    पंजिम, मांडवी नदी और मीरामार!

    आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| पिछले दिनों मैंने देश-विदेश के कुछ स्थानों के भ्रमण पर आधारित ब्लॉग लिखे, जिनका प्रारंभ मैंने लंदन से किया था और इस बात को भी रेखांकित किया था कि लंदन के जीवन में थेम्स नदी…

  • 6th Mar 2021

    चाँद निकला तो सो गईं आँखें!

    नक़्श लायलपुरी साहब एक प्रमुख साहित्यकार और फिल्मी गीतकार रहे हैं, उनके अनेक गीत हम आज भी गुनगुनाते हैं, जैसे ‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’, ‘कई सदियों से कई जन्मों से’ आदि-आदि| आज उनकी एक सुंदर सी ग़ज़ल मैं शेयर कर रहा हूँ, जिसमें विभिन्न परिस्थितियों और मनः स्थितियों में आँखों की…

  • 5th Mar 2021

    यह कवि का घर है !

    डॉ रामदरश मिश्र जी, जिनकी रचना मैं आज शेयर कर रहा हूँ, वे हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं और कविता, कहानी तथा उपन्यास लेखन, सभी क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय एवं सम्मानित हैं| आज की उनकी इस रचना में भी उन्होंने कवि की अलग प्रकार की दृष्टि और दर्शन का परिचय दिया है- गेंदे…

  • 4th Mar 2021

    बस यही एक अच्छी बात है!

    आज एक ऐसे रचनाकार की रचना शेयर कर रहा हूँ, जिनकी कोई रचना शायद मैंने पहले शेयर नहीं की है| श्री राजेन्द्र राजन एक श्रेष्ठ रचनाकार हैं जिन्होंने अनेक श्रेष्ठ कविताएं, गीत और कहानियाँ लिखी हैं| आज मैं उनकी एक सुंदर रचना शेयर कर रहा हूँ- मेरे मन मेंनफ़रत और गुस्से की आग,कुंठाओं के किस्से,और…

  • 3rd Mar 2021

    दिल को वही काम आ गया!

    आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| खास बात ये है आज का ये गीत मुकेश जी ने शम्मी कपूर जी के लिए गाया था, शायद मुकेश जी ने बहुत कम गीत गाये होंगे शम्मी कपूर जी के लिए, मुझे तो कोई और याद…

  • 2nd Mar 2021

    हम आपकी आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो!

    आज गुरुदत्त जी की फिल्म-प्यासा का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे रफी साहब और गीता दत्त जी ने गाया है| इसमें यही सब बताया गया कि नायिका का प्यार पाने के लिए आशिक़ महोदय किस हद तक जाने को तैयार रहते हैं और क्या-क्या सहना पड़ता है मासूम से आशिक़ को| यह मजेदार…

  • 1st Mar 2021

    शिशु की दुनिया – रवीन्द्रनाथ ठाकुर

    आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…

  • 28th Feb 2021

    मेरी तस्वीर अधूरी रहनी थी!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते…

  • 27th Feb 2021

    अब दो आलम में उजाले ही उजाले होंगे!

    आज सोचता हूँ कि गुलाम अली जी की गाई एक और ग़ज़ल शेयर करूं| इस ग़ज़ल के लेखक हैं ज़नाब परवेज़ जालंधरी साहब| इस ग़ज़ल में मानो एक चुनौती है, या कहें कि जो अपने आपको कुर्बान करने को तैयार हो, वही ‘तुमसे’ इश्क़ कर पाएगा, कहा गया है न, ‘शीश उतारे भुईं धरे, सो…

  • 26th Feb 2021

    ये कहानी फिर सही!

    कविताओं और शायरी के मामले में, मूल परंपरा तो यही रही है कि हम रचनाओं को उनके रचयिता याने कवि अथवा शायर के नाम से जानते रहे हैं| लेकिन यह भी सच्चाई है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ सामान्य जनता तक तभी पहुँच पाती हैं जब उन्हें कोई अच्छा गायक, अच्छे संगीत के साथ गाता…

←Previous Page
1 … 1,254 1,255 1,256 1,257 1,258 … 1,377
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    • SamaySakshi
    • Join 1,143 other subscribers.
    • Already have a WordPress.com account? Log in now.
    • SamaySakshi
    • Subscribe Subscribed
    • Sign up
    • Log in
    • Report this content
    • View site in Reader
    • Manage subscriptions
    • Collapse this bar