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पंजिम, मांडवी नदी और मीरामार!
आज फिर से पुरानी पोस्ट का दिन है, लीजिए मैं अपनी एक पुरानी पोस्ट, फिर से शेयर कर रहा हूँ| पिछले दिनों मैंने देश-विदेश के कुछ स्थानों के भ्रमण पर आधारित ब्लॉग लिखे, जिनका प्रारंभ मैंने लंदन से किया था और इस बात को भी रेखांकित किया था कि लंदन के जीवन में थेम्स नदी…
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चाँद निकला तो सो गईं आँखें!
नक़्श लायलपुरी साहब एक प्रमुख साहित्यकार और फिल्मी गीतकार रहे हैं, उनके अनेक गीत हम आज भी गुनगुनाते हैं, जैसे ‘मैं तो हर मोड़ पर तुझको दूंगा सदा’, ‘कई सदियों से कई जन्मों से’ आदि-आदि| आज उनकी एक सुंदर सी ग़ज़ल मैं शेयर कर रहा हूँ, जिसमें विभिन्न परिस्थितियों और मनः स्थितियों में आँखों की…
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यह कवि का घर है !
डॉ रामदरश मिश्र जी, जिनकी रचना मैं आज शेयर कर रहा हूँ, वे हिन्दी के प्रतिष्ठित साहित्यकार हैं और कविता, कहानी तथा उपन्यास लेखन, सभी क्षेत्रों में समान रूप से सक्रिय एवं सम्मानित हैं| आज की उनकी इस रचना में भी उन्होंने कवि की अलग प्रकार की दृष्टि और दर्शन का परिचय दिया है- गेंदे…
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बस यही एक अच्छी बात है!
आज एक ऐसे रचनाकार की रचना शेयर कर रहा हूँ, जिनकी कोई रचना शायद मैंने पहले शेयर नहीं की है| श्री राजेन्द्र राजन एक श्रेष्ठ रचनाकार हैं जिन्होंने अनेक श्रेष्ठ कविताएं, गीत और कहानियाँ लिखी हैं| आज मैं उनकी एक सुंदर रचना शेयर कर रहा हूँ- मेरे मन मेंनफ़रत और गुस्से की आग,कुंठाओं के किस्से,और…
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दिल को वही काम आ गया!
आज फिर से मैं अपने प्रिय गायक मुकेश जी का गाया एक और गीत शेयर कर रहा हूँ| खास बात ये है आज का ये गीत मुकेश जी ने शम्मी कपूर जी के लिए गाया था, शायद मुकेश जी ने बहुत कम गीत गाये होंगे शम्मी कपूर जी के लिए, मुझे तो कोई और याद…
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हम आपकी आँखों से नींदें ही उड़ा दें तो!
आज गुरुदत्त जी की फिल्म-प्यासा का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे रफी साहब और गीता दत्त जी ने गाया है| इसमें यही सब बताया गया कि नायिका का प्यार पाने के लिए आशिक़ महोदय किस हद तक जाने को तैयार रहते हैं और क्या-क्या सहना पड़ता है मासूम से आशिक़ को| यह मजेदार…
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शिशु की दुनिया – रवीन्द्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। आज भी मैंने अनुवाद के लिए अंग्रेजी कविता को ऑनलाइन उपलब्ध कविताओं…
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मेरी तस्वीर अधूरी रहनी थी!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- हिंदी के एक अत्यंत श्रेष्ठ गीतकार थे श्री भारत भूषण जी, मेरठ के रहने वाले थे और काव्य मंचों पर मधुरता बिखेरते थे। मैं यह नहीं कह सकता कि वे सबसे लोकप्रिय थे, परंतु जो लोग कवि-सम्मेलनों में कविता, गीतों के आस्वादन के लिए जाते…
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अब दो आलम में उजाले ही उजाले होंगे!
आज सोचता हूँ कि गुलाम अली जी की गाई एक और ग़ज़ल शेयर करूं| इस ग़ज़ल के लेखक हैं ज़नाब परवेज़ जालंधरी साहब| इस ग़ज़ल में मानो एक चुनौती है, या कहें कि जो अपने आपको कुर्बान करने को तैयार हो, वही ‘तुमसे’ इश्क़ कर पाएगा, कहा गया है न, ‘शीश उतारे भुईं धरे, सो…
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ये कहानी फिर सही!
कविताओं और शायरी के मामले में, मूल परंपरा तो यही रही है कि हम रचनाओं को उनके रचयिता याने कवि अथवा शायर के नाम से जानते रहे हैं| लेकिन यह भी सच्चाई है कि बहुत सी अच्छी रचनाएँ सामान्य जनता तक तभी पहुँच पाती हैं जब उन्हें कोई अच्छा गायक, अच्छे संगीत के साथ गाता…