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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Apr 2022

    जमुन – जल मेघ!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ कवि, गीतकार, संपादक और राजभाषा से जुड़े उच्च अधिकारी रहे, माननीय डॉक्टर बुदधिनाथ मिश्र जी का एक नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| डॉक्टर मिश्र की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं, आज का यह नवगीत उनके नवगीत संग्रह- ‘शिखरिणी’ से लिया गया है|मौसम के छविचित्र को अपने…

  • 16th Apr 2022

    लेकिन कभी रोया नहीं!

    जानता हूँ एक ऐसे शख्स को मैं भी ‘मुनीर’,गम से पत्थर हो गया लेकिन कभी रोया नहीं| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Apr 2022

    मैंने जो बोया नहीं!

    जुर्म आदम ने किया और नस्ले-आदम को सजा,काटा हूँ जिंदगी भर मैंने जो बोया नहीं| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Apr 2022

    वो लबे-गोया नहीं!

    हर तरफ़ दीवार-ओ-दर और उनमें आँखों का हुजूम,कह सके जो दिल की हालत वो लबे-गोया नहीं| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Apr 2022

    वो शब को देर तक सोया नहीं!

    नींद का हल्का गुलाबी सा खुमार आंखों में था,यूँ लगा जैसे वो शब को देर तक सोया नहीं| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Apr 2022

    मैंने तुझे खोया नहीं!

    ग़म की बारिश ने भी तेरे नक्श को धोया नहीं,तूने मुझको खो दिया, मैंने तुझे खोया नहीं| मुनीर नियाज़ी

  • 16th Apr 2022

    मुझसे इक नज़्म का वादा है!

    आज गुलज़ार साहब की एक लोकप्रिय नज़्म शेयर कर रहा हूँ, शायद आपने पहले भी सुनी होगी| गुलज़ार साहब का परिचय देने की तो शायद जरूरत ही नहीं है| लीजिए प्रस्तुत है यह नज़्म- मुझसे इक नज़्म का वादा है, मिलेगी मुझकोडूबती नब्ज़ों में, जब दर्द को नींद आने लगेज़र्द सा चेहरा लिए चाँद, उफ़क़…

  • 15th Apr 2022

    भारत महिमा – जयशंकर प्रसाद

    आज छायावाद युग के एक प्रमुख स्तंभ तथा कामायनी, आँसू आदि अनेक गौरवामयी श्रेष्ठ रचनाओं के रचयिता स्वर्गीय जयशंकर प्रसाद जी की भारत के गौरव का वर्णन करने वाली एक प्रसिद्ध रचना शेयर कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है यह रचना- हिमालय के आँगन में उसे, प्रथम किरणों का दे उपहारउषा ने हँस अभिनंदन किया…

  • 14th Apr 2022

    सच न बोलना!

    स्वर्गीय बाबा नागार्जुन जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| नागार्जुन जी अपने किस्म के अनूठे कवि थे, फक्कड़पन के साथ जीवन जीने वाले और खरी बात कहने वाले| लीजिए आज प्रस्तुत है बाबा नागार्जुन जी की यह कविता, गरीब मजदूरों का जो हाल उन्होंने देखा और ईमानदारी से और पूरी प्रभाविता के…

  • 13th Apr 2022

    मैं छः सेवक रखता हूँ – रुड्यार्ड किप्लिंग

    फिर से मैं आज अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट शेयर कर रहा हूँ| आज, मैं विख्यात ब्रिटिश कवि रुड्यार्ड किप्लिंग की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। श्री किप्लिंग एक ब्रिटिश कवि थे लेकिन उनका जन्म ब्रिटिश शासन के दौरान, मुम्बई में ही हुआ था। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता…

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