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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Apr 2022

    श्रीराम जी की जलसमाधि !

    अभी हमने श्रीरामनवमी के अवसर पर प्रभु श्रीराम जी को याद किया| इस अवसर पर मैं अपनी एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा हूँ | आज फिर से मैं अपने प्रिय कवि/गीतकारों में से एक स्व. भारत भूषण जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। इस रचना में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम की जलसमाधि का…

  • 11th Apr 2022

    तुम हमें प्यार करो या ना करो!

    स्वर्गीय शैलेन्द्र जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने पहले भी कहा है शैलेन्द्र जी फिल्म नगरी में विशाल बैनरों से जुड़े रहकर भी अंत तक एक जनकवि बने रहे| यह गीत 1964 में रिलीज़ हुई फिल्म – ‘कैसे कहूँ’ के लिए लता मंगेशकर जी ने अपने सुमधुर स्वर में…

  • 10th Apr 2022

    तुम न जाने किस जहाँ में खो गये!

    गायक सोनू निगम का एक इंटरव्यू सुन रहा था, जिसमें उन्होंने स्वर्गीय लता मंगेशकर जी के एक गीत को मिसाल के रूप में याद किया था| मुझे लगा कि आज इसी गीत को शेयर कर लेना चाहिए| यह गीत है फिल्म- ‘सज़ा’ से जिसे लिखा था – साहिर लुधियानवी जी ने और इसका संगीत तैयार…

  • 9th Apr 2022

    मेरी दिल्ली!

    आज फिर से लंबे समय बाद दिल्ली-गुड़गांव क्षेत्र में आया हूँ| कुछ लिख पाऊँगा तो लिखूँगा, फिलहाल दिल्ली की एक पुरानी यात्रा से जुड़ा आलेख शेयर कर रहा हूँ| काफी लंबे समय के बाद दिल्ली आना हुआ, उस दिल्ली में जो लगभग डेढ़ वर्ष पहले तक मेरी थी, उसी तरह जैसे और भी लाखों, करोडों…

  • 8th Apr 2022

    छलक उठती हैं मेरी आँखें!

    दुख किसी का हो छलक उठती हैं मेरी आँखें,सारी मिट्टी मेरे तालाब में आ जाती है| मुनव्वर राना

  • 8th Apr 2022

    रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है!

    ज़िन्दगी तू भी भिखारिन की रिदा ओढ़े हुए,कूचा – ए – रेशमो -किमख़्वाब में आ जाती है| मुनव्वर राना

  • 8th Apr 2022

    दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है!

    एक कमरे में बसर करता है सारा कुनबा,सारी दुनिया दिले- बेताब में आ जाती है| मुनव्वर राना

  • 8th Apr 2022

    तस्वीर-सी महताब में आ जाती है!

    रात भर जागते रहने का सिला है शायद,तेरी तस्वीर-सी महताब में आ जाती है| मुनव्वर राना

  • 8th Apr 2022

    इसी पंजाब में आ जाती है!

    दिल की गलियों से तेरी याद निकलती ही नहीं,सोहनी फिर इसी पंजाब में आ जाती है| मुनव्वर राना

  • 8th Apr 2022

    अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ!

    रोज़ मैं अपने लहू से उसे ख़त लिखता हूँ,रोज़ उंगली मेरी तेज़ाब में आ जाती है| मुनव्वर राना

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