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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 3rd Jun 2021

    लो दिन बीता, लो रात गई!

    किसी जमाने में हिन्दी कवि सम्मेलनों में धूम मचाने वाले स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी का एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी सरल भाषा में बड़ी प्रभावी अभिव्यक्ति के लिए प्रसिद्ध थे| उनकी मधुशाला के लिए तो लोग दीवाने हो जाते थे| लीजिए आज प्रस्तुत है बच्चन जी का यह गीत- सूरज…

  • 2nd Jun 2021

    सर्दी की रात में सैर !

    आज फिर से बारी है पुरानी ब्लॉग पोस्ट की| आज मैं विख्यात अंग्रेजी कवि श्री रॉबर्ट फ्रॉस्ट की एक कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल कविता प्रस्तुत कर रहा हूँ। पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया कविता का भावानुवाद- सर्दियों में शाम की सैर के लिए-कोई नहीं था मेरे साथ, जिससे कर सकूं…

  • 1st Jun 2021

    बड़ी दूर तक रात ही रात होगी!

    डॉ बशीर बद्र जी आज की उर्दू शायरी की पहचान बनाने वाले प्रमुख शायरों में से एक हैं। उनके कुछ शेर तो जैसे मुहावरा बन गए हैं| जैसे आज की ग़ज़ल का एक शेर भी अक्सर दोहराया जाता है- ‘मुसाफ़िर हैं हम भी मुसाफ़िर हो तुम भी,किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी’| डॉ बशीर बद्र…

  • 31st May 2021

    मैं एक तड़पता क़तरा हूँ!

    अली सरदार जाफ़री साहब की एक लंबी कविता या कहें की नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| अली सरदार जाफ़री साहब बहुत विख्यात शायर थे और हिन्दी फिल्मों में भी उनकी अनेक रचनाओं का सदुपयोग किया गया है| आज की इस रचना में अली सरदार जाफ़री साहब ने ज़िंदगी के बारे में, खुलकर अपने विचार…

  • 30th May 2021

    आँख बच्ची की पनीली है!

    आज अदम गोंडवी जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| ठेठ देहाती अंदाज़ में आम जनता के जीवन की सच्चाइयों को अदम गोंडवी जी ने बड़े सलीके के साथ बेबाक़ी के साथ अभिव्यक्त किया है| लीजिए आज अदम गोंडवी जी की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए- घर में ठंडे चूल्हे पर अगर खाली पतीली…

  • 29th May 2021

    जीना न हो हराम, चलो मयकदे चलें!

    ज़नाब कृष्ण बिहारी ‘नूर’ साहब की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| ‘नूर’ साहब उस समय शायरी के क्षेत्र में सक्रिय गिने-चुने हिन्दू शायरों में से एक थे| कई बार ऐसी प्रतियोगिता भी होती थीं, जिनमें एक मिसरे को लेकर ग़ज़ल के शेर लिखने को कहा जाता था| एक बार ग़ज़ल लिखने के लिए…

  • 28th May 2021

    बस एक निगाह प्यार की!

    आज मोहम्मद रफी साहब का एक गाना शेयर कर रहा हूँ| रफी साहब ने हर तरह के गाने गाए हैं, और आज का गाना मस्ती से भरा हुआ है| वर्ष 1965 में रिलीज़ हुई फिल्म- मेरे सनम के लिए मजरूह सुल्तानपुरी साहब के लिखे इस गीत का संगीत दिया है ओ पी नैयर साहब ने|…

  • 27th May 2021

    इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है !

    आज दुष्यंत कुमार जी की लिखी एक और ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ, जो आपातकाल में लिखी गई उनकी ग़ज़लों में शामिल थी और जिसको उनके संकलन ‘साये में धूप’ में शामिल किया गया था| इसमें सभी रचनाएँ आपातकाल के विरोध में आन्दोलनधर्मी ग़ज़लें थीं| उस समय आपातकाल के विरोध में जयप्रकाश नारायण जी के…

  • 26th May 2021

    आना-जाना रहे, रहे ना रहे!

    आज फिर से प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग,जो मेरे लिए अविस्मरणीय है। दिल्ली में सरकारी सेवा के दौरान ही मैंने स्टाफ सेलेक्शन कमीशन की एक और परीक्षा दी, जो हिंदी अनुवादक के पद पर चयन के लिए थी। इस परीक्षा में मैं सफल हुआ और उसके आधार पर ही आकाशवाणी, जयपुर में अनुवादक पद…

  • 25th May 2021

    चांद आहें भरेगा!

    आज एक बार फिर मैं अपने प्रिय गायक- मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर करूंगा| नायिका के सौंदर्य का वर्णन करने वाले अनेक गीत आपने सुने होंगे, लेकिन इस ऊंचाई वाला गीत बहुत मुश्किल से सुनने को मिलता है, और फिर मुकेश जी की आवाज़ तो इसमें अलग से जान डाल ही रही है|…

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