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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Jul 2021

    टोले के कवि!

    मैं पिछले दिनों (फ़ेसबुक पर) अपनी पुरानी कुछ कविताएं शेयर कर रहा था, परंतु आज जो गीत शेयर कर रहा हूँ, वह पुराना नहीं, अभी का है| एक पुरानी घटना याद आ रही है, मैं उस समय अपने संस्थान के लिए कवि-सम्मेलन आयोजित करता था| उस समय मंच के एक कवि थे- निर्भय हाथरसी, वे…

  • 12th Jul 2021

    अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते!

    अकबर इलाहाबादी साहब एक महान शायर थे जिन्होंने मजाहिया से लेकर गंभीर तक, सभी प्रकार की शायरी की है| जैसे- ‘क़ौम के ग़म में डिनर खाते हैं हुक्काम के साथ’ से लेकर ‘हंगामा है क्यों बरपा, थोड़ी सी जो पी ली है’ तक| लीजिए आज प्रस्तुत है, अकबर इलाहाबादी साहब की यह ग़ज़ल– आँखें मुझे…

  • 11th Jul 2021

    टूटा पहिया!

    मैंरथ का टूटा हुआ पहिया हूँलेकिन मुझे फेंको मत ! क्या जाने कबइस दुरूह चक्रव्यूह मेंअक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआकोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय ! अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भीबड़े-बड़े महारथीअकेली निहत्थी आवाज़ कोअपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहेंतब मैंरथ का टूटा हुआ पहियाउसके हाथों मेंब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ…

  • 10th Jul 2021

    तुम प्राणों की अगन हरो तो!

    आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक बार फिर से आज मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक प्रेम की गहनता और पवित्रता से भरा गीत शेयर कर रहा हूँ| भावुकता और समर्पण वैसे तो जीवन में कठिनाई से ही कहीं काम आते हैं, आजकल बहुत कम…

  • 9th Jul 2021

    अखबारवाला!

    श्री रघुवीर सहाय जी अपने समय के एक श्रेष्ठ कवि रहे हैं, बेबाक अंदाज़ में अपनी बात कहते थे, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ जिसे अज्ञेय जी ने शुरू किया था, उनके बाद उसके संपादक रघुवीर सहाय जी बने थे| खबरों के विश्लेषण के मामले में ‘दिनमान’ का अपना विशेष स्थान…

  • 8th Jul 2021

    जितनी गठरी भारी होगी!

    आज हिन्दी मंचों और फिल्मों के लाडले गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी के गीतों में अक्सर दर्शन भी शामिल होता है, जैसे इस गीत में भरपूर है| लीजिए आज नीरज जी का यह सुंदर गीत प्रस्तुत है – जितना कम सामान रहेगा,उतना सफ़र आसान रहेगा|…

  • 7th Jul 2021

    कल फिर सुबह नई होगी!

    माननीय रामदरश मिश्र जी ऐसे साहित्यकार हैं जिन्होंने साहित्य की लगभग हर विधा में लिखा है| अनेक सम्मानों से विभूषित रामदरश जी ने आम आदमी की स्थितियों का चित्रण बड़ी बारीकी से किया है| लीजिए आज मैं रामदरश जी का यह आशावादी गीत शेयर कर रहा हूँ – दिन को ही हो गई रात-सी, लगता…

  • 6th Jul 2021

    हम सिगार से जला किए!

    आज स्वर्गीय कुमार शिव जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने बड़े खूबसूरत तरीके से कहा है कि किस प्रकार ज़िंदगी ने हमारी हालत, राखदान में पड़े सिगार जैसी कर दी है| राखदान में सुलगता सिगार, जो मदिरा पान, संगीत और राजनैतिक गतिविधियों तथा बहस आदि का भी साक्षी बनता है| लीजिए…

  • 5th Jul 2021

    तनहाइयों के पेड़ से अटकी पतंग हूँ!

    सूर्यभानु गुप्त जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| सूर्यभानु जी की ग़ज़लों में वह चमत्कार अक्सर शामिल होता है, जिसकी अच्छी कविता से उम्मीद की जाती है| उनकी एक बहुत खूबसूरत ग़ज़ल जो मैंने पहले शेयर की है, उसका एक शेर दोहराना चाहूँगा- एक अच्छा शेर कह के मुझको ये महसूस हुआ,बहुत…

  • 4th Jul 2021

    एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम!

    आज ज़नाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल के कुछ शेर शेयर कर रहा हूँ| क़तील साहब भारतीय उपमहाद्वीप के जाने-माने शायर रहे हैं और उनकी ग़ज़लें ग़ुलाम अली साहब और जगजीत सिंह जी जैसे प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने गाई हैं| लीजिए आज क़तील शिफ़ाई साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा…

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