-
टोले के कवि!
मैं पिछले दिनों (फ़ेसबुक पर) अपनी पुरानी कुछ कविताएं शेयर कर रहा था, परंतु आज जो गीत शेयर कर रहा हूँ, वह पुराना नहीं, अभी का है| एक पुरानी घटना याद आ रही है, मैं उस समय अपने संस्थान के लिए कवि-सम्मेलन आयोजित करता था| उस समय मंच के एक कवि थे- निर्भय हाथरसी, वे…
-
टूटा पहिया!
मैंरथ का टूटा हुआ पहिया हूँलेकिन मुझे फेंको मत ! क्या जाने कबइस दुरूह चक्रव्यूह मेंअक्षौहिणी सेनाओं को चुनौती देता हुआकोई दुस्साहसी अभिमन्यु आकर घिर जाय ! अपने पक्ष को असत्य जानते हुए भीबड़े-बड़े महारथीअकेली निहत्थी आवाज़ कोअपने ब्रह्मास्त्रों से कुचल देना चाहेंतब मैंरथ का टूटा हुआ पहियाउसके हाथों मेंब्रह्मास्त्रों से लोहा ले सकता हूँ…
-
तुम प्राणों की अगन हरो तो!
आज फिर से प्रस्तुत है, एक और पुरानी ब्लॉग पोस्ट- एक बार फिर से आज मैं हिन्दी के दुलारे गीतकार स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक प्रेम की गहनता और पवित्रता से भरा गीत शेयर कर रहा हूँ| भावुकता और समर्पण वैसे तो जीवन में कठिनाई से ही कहीं काम आते हैं, आजकल बहुत कम…
-
अखबारवाला!
श्री रघुवीर सहाय जी अपने समय के एक श्रेष्ठ कवि रहे हैं, बेबाक अंदाज़ में अपनी बात कहते थे, टाइम्स ऑफ इंडिया समूह की साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ जिसे अज्ञेय जी ने शुरू किया था, उनके बाद उसके संपादक रघुवीर सहाय जी बने थे| खबरों के विश्लेषण के मामले में ‘दिनमान’ का अपना विशेष स्थान…
-
जितनी गठरी भारी होगी!
आज हिन्दी मंचों और फिल्मों के लाडले गीतकार स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी के गीतों में अक्सर दर्शन भी शामिल होता है, जैसे इस गीत में भरपूर है| लीजिए आज नीरज जी का यह सुंदर गीत प्रस्तुत है – जितना कम सामान रहेगा,उतना सफ़र आसान रहेगा|…
-
हम सिगार से जला किए!
आज स्वर्गीय कुमार शिव जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ, जिसमें उन्होंने बड़े खूबसूरत तरीके से कहा है कि किस प्रकार ज़िंदगी ने हमारी हालत, राखदान में पड़े सिगार जैसी कर दी है| राखदान में सुलगता सिगार, जो मदिरा पान, संगीत और राजनैतिक गतिविधियों तथा बहस आदि का भी साक्षी बनता है| लीजिए…
-
तनहाइयों के पेड़ से अटकी पतंग हूँ!
सूर्यभानु गुप्त जी की एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| सूर्यभानु जी की ग़ज़लों में वह चमत्कार अक्सर शामिल होता है, जिसकी अच्छी कविता से उम्मीद की जाती है| उनकी एक बहुत खूबसूरत ग़ज़ल जो मैंने पहले शेयर की है, उसका एक शेर दोहराना चाहूँगा- एक अच्छा शेर कह के मुझको ये महसूस हुआ,बहुत…
-
एक दूसरे की याद में रोया करेंगे हम!
आज ज़नाब क़तील शिफ़ाई साहब की एक ग़ज़ल के कुछ शेर शेयर कर रहा हूँ| क़तील साहब भारतीय उपमहाद्वीप के जाने-माने शायर रहे हैं और उनकी ग़ज़लें ग़ुलाम अली साहब और जगजीत सिंह जी जैसे प्रमुख ग़ज़ल गायकों ने गाई हैं| लीजिए आज क़तील शिफ़ाई साहब की इस ग़ज़ल का आनंद लीजिए, जिसे जगजीत सिंह-चित्रा…