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बुनियाद हिलनी चाहिए!
स्वर्गीय दुष्यंत कुमार जी की कुछ रचनाएं मैं पहले शेयर कर चुका हूँ| दुष्यंत कुमार जी हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे, परंतु उनको विशेष रूप से प्रसिद्धि मिली थी आपातकाल में प्रकाशित उनकी विद्रोह के स्वर गुंजाने वाली ग़ज़लों से, जिन्हें बाद में उनके ग़ज़ल संकलन ‘साये में धूप’ में संकलित किया गया|…
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फिर-फिर वही सन्नाटा है!
सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी अपने समय में हिन्दी के प्रमुख कवियों में शामिल थे तथा प्रतिष्ठित समाचार-पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादक मण्डल में भी थे| सर्वेश्वर जी को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए थे| आज मैं प्रस्तुत कर रहा हूँ सर्वेश्वर दयाल सक्सेना जी की यह ग़ज़ल – अजनबी देश है यह, जी…
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तब भी तो तुम आए थे!
अली सरदार जाफरी साहब की एक नज़्म आज शेयर कर रहा हूँ| जाफरी साहब का नाम हिंदुस्तान के प्रसिद्ध शायरों में शामिल है और उनको भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था| लीजिए प्रस्तुत है अली सरदार जाफरी साहब की यह नज़्म- जब नहीं आए थे तुम, तब भी तो तुम आए थेआँख…
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ओ दुनिया के रखवाले!
आज मैं 1952 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘बैजू बावरा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो भजन अथवा कहें कि पीड़ित भक्त के आर्तनाद के रूप में है, शकील बदायुनी साहब ने लिखा था और नौशाद साहब ने इसका संगीत दिया था, यह गीत रफी साहब के अनमोल गीतों में शामिल है, जिसमें उन्होंने…
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सूरज रोज़ निकलता है!
आज फिर से एक बार मैं हिन्दी कवि सम्मेलनों में किसी समय गूंजने वाले एक अलग प्रकार के स्वर- स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ‘निर्धन’ जी की कवि सम्मेलनों में उपस्थिति एक चमत्कारी प्रभाव डालती थी| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय शिशुपाल सिंह ‘निर्धन’ जी का यह गीत- रात-रात…
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वसंत का एक दिन – रवींद्रनाथ ठाकुर
लीजिए आज फिर से प्रस्तुत है एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट| आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। लीजिए पहले प्रस्तुत है मेरे…
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कब तक प्रतीक्षारत रहें!
आज काफी समय बाद मैं अपने एक अत्यंत प्रिय कवि स्वर्गीय किशन सरोज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ, जिनका स्नेह पाने का भी अवसर मुझे मिला था| यह रचना कवि सम्मेलनी रचनाओं से बिल्कुल अलग है और सामान्य जन के सपनों और अभिलाषाओं की बात करती है, जिनको राजनीति सिर्फ छलावा देती…
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मेरी एक और कविता
आज फिर से पुराना लिखा हुआ याद आ रहा है, रचना ही कहूँगा इसे भी| जैसा याद आ रहा है, अपनी रचनाओं को शेयर करने के क्रम में इसे भी, जैसा है वैसा ही प्रस्तुत कर रहा हूँ- गीत जो लिखे गए, लिखे गए। किसी एक शर बिंधे, रंगे खग की आकुल चेष्टाओं की छाप,भोगीं…
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अब रात गुजरने वाली है!
आज मैं 1951 में रिलीज़ हुई राजकपूर जी की फिल्म- ‘आवारा’ का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जिसे हसरत जयपुरी जी ने लिखा था और शंकर जयकिशन जी की संगीत जगत की प्रसिद्ध जोड़ी के संगीत निर्देशन में लता मंगेशकर जी ने अपने मधुर कंठ से यह गीत गाया था| लीजिए आज प्रस्तुत है…
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सौ वर्ष बाद!
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…