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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Aug 2021

    अपने बस में आज न हूँ मैं!

    हिन्दी काव्य मंचों के एक अद्वितीय गीतकार जिनकी उपस्थिति से मंच को गरिमा और ऊंचाई मिलती थी, ऐसे स्वर्गीय भारत भूषण जी का एक और गीत आज शेयर कर रहा हूँ| भारत भूषण जी के अनेक गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं, आज प्रस्तुत है यह गीत| रचना अपना परिचय स्वयं देती है, लीजिए…

  • 11th Aug 2021

    ना समझे वो अनाड़ी हैं!

    कल राज कपूर जी की ‘आवारा’ फिल्म का एक गीत शेयर किया था, आज उनकी ही फिल्म ‘अनाड़ी’ का एक गीत याद आ रहा है| कल के गाने में भी राजकपूर थे, उनकी नायिका तो होगी ही, लेकिन आज की फिल्म में नायिका नर्गिस जी नहीं ‘नूतन जी थीं, एक बात और है, इन दोनों…

  • 10th Aug 2021

    दम भर जो उधर मुँह फेरे!

    आज मुकेश जी और लता जी का एक रोमांटिक युगल गीत याद आ रहा है| गीतकार शैलेन्द्र जी का लिखा यह गीत, 1951 में रिलीज़ हुई फिल्म-‘आवारा’ में राज कपूर और नर्गिस की सदाबहार जोड़ी पर फिल्माया गया था और इसका मधुर संगीत शंकर-जयकिशन की संगीतमय जोड़ी ने तैयार किया था| हमारे कवि-रचनाकार चांद से…

  • 9th Aug 2021

    आदमी मुसाफ़िर है !

    फिल्मी के अत्यंत प्रसिद्ध और सफल गीतकार स्वर्गीय आनंद बख्शी जी का लिखा एक गीत आज शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में बहुत सरल शब्दों में जीवन दर्शन की कुछ बातें की गई हैं| लीजिए प्रस्तुत है आनंद बख्शी जी का लिखा यह गीत- आदमी मुसाफ़िर है आता है जाता है,आते-जाते रस्ते में यादें…

  • 8th Aug 2021

    हिंदोस्तान तेरा है|

    आज अशोक चक्रधर जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| अशोक जी वैसे तो हास्य-व्यंग्य के कवि हैं, लेकिन इस कविता का तेवर कुछ अलग ही है| बाकी बात तो कविता खुद ही कहेगी| लीजिए प्रस्तुत है अशोक चक्रधर जी की यह कविता – तू गर दरिन्दा है तो ये मसान तेरा है,अगर परिन्दा…

  • 7th Aug 2021

    भारत माता ग्रामवासिनी!

    छायावाद युग के एक स्तंभ, स्वर्गीय सुमित्रानंदन पंत जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| इस कविता को देखकर यह भी आभास होता है कि अब तक कविता कितनी बदल गया है| इस कविता में पंत जी ने उस समय की भारत माता की दयनीय स्थिति का मार्मिक चित्रण किया है| लीजिए प्रस्तुत…

  • 6th Aug 2021

    विषबुझे खंजर न फेंक!

    आज एक बार फिर से मैं अपने अग्रज और मेरे लिए गुरुतुल्य रहे श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ| लीजिए प्रस्तुत है डॉक्टर कुँवर बेचैन जी की यह ग़ज़ल – दो दिलों के दरमियाँ दीवार-सा अंतर न फेंक,चहचहाती बुलबुलों पर विषबुझे खंजर न…

  • 5th Aug 2021

    जैसे जैसे घर नियराया!

    आज मैं श्रेष्ठ नवगीत एवं ग़ज़ल लेखक स्वर्गीय ओम प्रभाकर जी का एक छोटा सा और खूबसूरत नवगीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| किस प्रकार हम अनेक प्रकार से अपने घर से जुड़े होते हैं| पुराने ग्रामीण परिवेश को याद करके इस गीत का और भी अच्छा आस्वादन किया जा सकता है| लीजिए प्रस्तुत है स्वर्गीय…

  • 4th Aug 2021

    एक मैं कि तेरे नाम से, ना-आशना आवारगी|

    आज फिर से एक पुरानी ब्लॉग-पोस्ट को दोहरा रहा हूँ| एक फिल्मी गाना याद आ रहा है, फिल्म थी- ’मैं नशे में हूँ’, यह गीत राज कपूर जी पर फिल्माया गया है, शैलेंद्र जी ने लिखा है, शंकर जयकिशन का संगीत और आवाज़ है मेरे प्रिय गायक मुकेश जी की। बोल हैं- हम हैं तो…

  • 3rd Aug 2021

    वक़्त करता जो वफ़ा!

    आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का गाया एक नायाब गीत शेयर कर रहा हूँ| यह गीत मुकेश जी ने फिल्म- ‘दिल ने पुकारा’ के लिए गाया था, इसे लिखा था इंदीवर जी ने और इसका संगीत तैयार किया था कल्याणजी – आनंदजी की संगीतमय जोड़ी ने| वक़्त के कारनामे बहुत से…

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