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आवारगी 5
ये दर्द की तनहाइयाँ, ये दश्त का वीराँ सफ़रहम लोग तो उकता गये अपनी सुना, आवारगी। मोहसिन नक़वी
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आवारगी 4
इक अजनबी झोंके ने जब पूछा मेरे ग़म का सबबसहरा की भीगी रेत पर मैंने लिखा आवारगी। मोहसिन नक़वी
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आवारगी 2
ये दिल, ये पागल दिल मेरा क्यों बुझ गया, आवारगीइस दश्त में इक शहर था वो क्या हुआ, आवारगी। मोहसिन नक़वी
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चारों ओर मचान है!
स्वर्गीय रमेश रंजक जी देश के अत्यंत सृजनधर्मी जनवादी नवागीतकार थे| अनेक बार उनको कवि गोष्ठियों में सुनने का अवसर मिला और मेरे लिए गर्व की बात है कि उन्होंने मेरा एक नवगीत अंतराल 4 में छपने के लिए भेजा था| रंजक जी के अनेक गीत किसी समय मुझे कंठस्थ थे, जैसे ‘बंधु रे हम…
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कच्ची दीवार हूं 5
अपने रिश्ते की नज़ाकत का भरम रख लेना,में तो आशिक हूँ दिवाना न बनाना मुझको। असरार अंसारी
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कच्ची दीवार हूं 4
वादा उतना ही करो जितना निभा सकती हो,ख्वाब पूरा जो न हो, वो न दिखाना मुझको। असरार अंसारी
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कच्ची दीवार हूं 3
बात करने में जो मुश्किल हो तुम्हे महफिल में,मैं समझ जाऊंगा नज़रों से बताना मुझको। असरार अंसारी
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कच्ची दीवार हूं 2
तुमको आंखों में तसव्वुर की तरह रखता हूं,दिल में धड़कन की तरह तुम भी बसाना मुझको। असरार अंसारी