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छुपेगा वो किसी बदली में!
किसे खबर थी बढ़ेगी कुछ और तारीक़ी,छुपेगा वो किसी बदली में चांदनी की तरह। क़तील शिफाई
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प्रश्न हूँ तुम्हारा ही!
आज एक बार फिर से में प्रसिद्ध कवि, कथाकार, गीतकार, संस्मरण लेखक और धर्मयुग के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| जैसा मैंने उल्लेख किया भारती जी ने साहित्य की प्रत्येक विधा में और पत्रकारिता एवं संपादन में भी अपना अमूल्य योगदान दिया था| उनकी कुछ पंक्तियाँ…
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सपना झरना नींद का!
सपना झरना नींद का, जागी आँखें प्यासपाना, खोना, खोजना, साँसों का इतिहास| निदा फाज़ली
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क्या मंगल क्या वीर!
सातों दिन भगवान के, क्या मंगल क्या वीर,जिस दिन सोये देर तक, भूखा रहे फ़कीर | निदा फाज़ली