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सीढ़ी फिसल न जाए कहीं!
कभी मचान पे चढ़ने की आरज़ू उभरीकभी ये डर कि ये सीढ़ी फिसल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार
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उम्र नशे में निकल न जाए कहीं!
तमाम रात तेरे मैकदे में मय पी हैतमाम उम्र नशे में निकल न जाए कहीं| दुष्यंत कुमार
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पिघल न जाए कहीं !
यों मुझको ख़ुद पे बहुत ऐतबार है लेकिनये बर्फ आंच के आगे पिघल न जाए कहीं दुष्यंत कुमार
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नज़ारा बदल न जाए कहीं!
नजर-नवाज़ नजारा बदल न जाए कहींजरा-सी बात है मुँह से निकल न जाए कहीं| दुषयांत कुमार
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हम तुम ना जुदा होंगे!
मोहम्मद रफी साहब का नाम, भारतीय सिने संगीत की दुनिया में किसी परिचय का मोहताज नहीं है| जिस तरह नायकों की दुनिया में राज कपूर, दिलीप कुमार और देव आनंद की तिकड़ी प्रसिद्ध थे, उसी प्रकार पुरुष गायकों की दुनिया में रफी, मुकेश और किशोर कुमार ऐसे नाम हैं जिनको भुलाया जाना मुश्किल है| आज…
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वो भी हर किसी की तरह!
कभी न सोचा था हमने क़तील उसके लिए,करेगा हम पे सितम वो भी हर किसी की तरह। क़तील शिफाई
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वो भी न बन सका अपना!
सितम तो ये है कि वो भी न बन सका अपना,क़ुबूल हमने किया जिसका गम खुशी की तरह। क़तील शिफाई