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तेरा पैमां जाना!
अब के तज्दीद-ए-वफ़ा का नहीं इम्काँ जाना,याद क्या तुझ को दिलाएँ तेरा पैमां जाना| अहमद फ़राज़
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मैंने कुछ नहीं पूछा – रवींद्र नाथ ठाकुर
फिर से आज पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया…
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धमकियों की संस्कृति!
आज भारतीय क्रिकेट के बहाने कुछ बात कर लेते हैं| क्रिकेट तो वैसे ही अनिश्चितताओं का खेल है, कोई दावे के साथ नहीं कह सकता कि वह जीतेगा| भारतीय टीम का मामला उससे भी कुछ आगे का है| हमारी क्रिकेट टीम का ऐसा रिकॉर्ड है कि वे दुनिया की सबसे मजबूत टीम को भी हरा…
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प्रेम दीप
एक बार फिर दीपावली के बहाने से बात करते हैं| आप सभी जानते हैं दीपावली हिंदुओं का पवित्र पर्व है| हमारी प्राचीन संस्कृति जिसे हम सामान्यतः भारतीय अथवा व्यापक रूप से हिन्दू संस्कृति के नाम से जानते है, यह संस्कृति दुनिया में निराली है| कितने ही महान संत, महात्मा और धर्म गुरू हुए हैं हमारे…
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भाव दीप
आज की दुनिया ने कोरोना की महामारी का सामना किया है, अभी भी यह संकट गया नहीं है| दीपावली के शुभ अवसर पर यही मंगल कामना है कि मानव जाति इस कोरोना रूपी दैत्य को पूरी तरह परास्त करे और पुनः प्रगति के मार्ग पर चल पड़े| सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे संतु निरामयाः, सर्वे भद्राणि…
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अंधेरा धरा पर कहीं रह न जाए!
दीपावली के सुअवसर पर आज मैं बिना किसी भूमिका के हिन्दी गीतों के राजकुंवर कहलाने वाले स्वर्गीय गोपाल दास ‘नीरज’ जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ| ईश्वर करें कि यह दीपावली हम सभी के जीवन में नई रोशनी लेकर ये और एक जागरूक व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के रूप में हम सभी सफलता…
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कोई फ़ैसला तो सुना दें!
सज़ा दें, सिला दें, बना दें, मिटा देंमगर वो कोई फ़ैसला तो सुना दें सुदर्शन फ़ाकिर
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चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें!
क़यामत के दीवाने कहते हैं हमसे,चलो उनके चहरे से पर्दा हटा दें| सुदर्शन फ़ाकिर
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वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें!
कभी ग़म की आँधी, जिन्हें छू न पाए,वफ़ाओं के हम, वो नशेमन बना दें| सुदर्शन फ़ाकिर