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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Nov 2021

    हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी!

    हर तरफ़ भागते दौड़ते रास्ते,हर तरफ़ आदमी का शिकार आदमी| निदा फ़ाज़ली

  • 11th Nov 2021

    अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी!

    सुबह से शाम तक बोझ ढोता हुआ,अपनी ही लाश का ख़ुद मज़ार आदमी| निदा फ़ाज़ली

  • 11th Nov 2021

    तनहाइयों का शिकार आदमी!

    हर तरफ़ हर जगह बेशुमार आदमी,फिर भी तनहाइयों का शिकार आदमी| निदा फ़ाज़ली

  • 11th Nov 2021

    रहें मुबारक पीनेवाले, खुली रहे यह मधुशाला!

    एक जमाने में कवि सम्मेलनों में अपने गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देने वाले स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी को आज याद करते हैं उनकी सबसे अधिक प्रसिद्ध कृति ‘मधुशाला’ के कुछ छंदों के माध्यम से, यह रचना उन्होंने उम्र खैयाम की रूबाइयों के आधार पर लिखी थी| यह रचना अपने आप में ही…

  • 10th Nov 2021

    हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे!

    हमें भी नींद आ जायेगी हम भी सो ही जायेंगे,अभी कुछ बेक़रारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Nov 2021

    यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

    हमें तो आज की शब पौ फटे तक जागना होगा,यही क़िस्मत हमारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Nov 2021

    कहे जाते हो रो-रो के हमारा हाल दुनिया से!

    कहे जाते हो रो-रो के हमारा हाल दुनिया से,ये कैसी राज़दारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Nov 2021

    ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

    तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आया,ये बाज़ी हमने हारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Nov 2021

    हमें ये रात भारी है सितारों तुम तो सो जाओ!

    हँसो और हँसते-हँसते डूबते जाओ ख़लाओं में,हमें ये रात भारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Nov 2021

    सितारों तुम तो सो जाओ!

    परेशां रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओ,सुकूत-ए-मर्ग तारी है सितारों तुम तो सो जाओ| क़तील शिफ़ाई

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