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मुट्ठी में वो रतन देखा!
ख़रीदने को जिसे कम थी दौलत-ए-दुनिया,किसी कबीर की मुट्ठी में वो रतन देखा| नीरज
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मैं हूँ बनफूल भला मेरा कैसा खिलना, क्या मुरझाना!
स्वर्गीय भारत भूषण जी एक असाधारण प्रतिभा वाले कवि और गीतकार थे| भारत भूषण जी के गीतों को सुनना ही एक दिव्य अनुभव होता था| भारत भूषण जी के अनेक गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं, आज जो गीत शेयर कर रहा हूँ ‘बनफूल’ यह भी भारत भूषण जी का एक प्रसिद्ध गीत है|…
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ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे!
मैं अपनी ज़ात में नीलाम हो रहा हूँ “क़तील”,ग़म-ए-हयात से कह दो ख़रीद लाये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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सारे जहाँ को है मालूम!
वो मेरा दोस्त है सारे जहाँ को है मालूम,दग़ा करे वो किसी से तो शर्म आये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाये मुझे!
वही तो सबसे ज़ियादा है नुक्ता-चीं मेरा, जो मुस्कुरा के हमेशा गले लगाये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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दोपहर न भाये मुझे!
मैं अपने पाँव तले रौंदता हूँ साये कोबदन मेरा ही सही दोपहर न भाये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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सौ बार आज़माये मुझे!
वो महरबाँ है तो इक़रार क्यूँ नहीं करतावो बदगुमाँ है तो सौ बार आज़माये मुझे। क़तील शिफ़ाई
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कि संग तुझपे गिरे और ज़ख़्म आये मुझे!
ये मोजज़ा भी मुहब्बत कभी दिखाये मुझेकि संग तुझपे गिरे और ज़ख़्म आये मुझे। क़तील शिफाई
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जग में रह जाएंगे, प्यारे तेरे बोल!
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज फिर से मैं हम सबके प्यारे मुकेश जी का एक बहुत प्यारा गीत शेयर कर रहा हूँ, और इस गीत के माध्यम से ही मैं मुकेश जी, राज कपूर साहब और मजरूह सुल्तानपुरी साहब को भी याद कर…