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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 27th Oct 2025

    पिंजरे टूट जाते हैं!

    बहुत दिन मस्लहत की क़ैद में रहते नहीं जज़्बे,मोहब्बत जब सदा देती है पिंजरे टूट जाते हैं| वसीम नादिर

  • 27th Oct 2025

    अच्छे अच्छे टूट जाते!

    मिरी औक़ात ही क्या है मैं इक नन्हा सा आँसू हूँ,बुलंदी से तो गिर कर अच्छे अच्छे टूट जाते हैं| वसीम नादिर

  • 27th Oct 2025

    लोग कैसे टूट जाते है!

    बिछड़ कर आप से ये तजरबा हो ही गया आख़िर,मैं अक्सर सोचता था लोग कैसे टूट जाते है| वसीम नादिर

  • 27th Oct 2025

    सुर की गति मैं क्या जानूं!

    आज फिर से मैं अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से अपने स्वर में प्रस्तुत कर रहा हूँ संत सूरदास जी का यह भजन जो मुकेश जी ने गाया है- सुर की गति मैं क्या जानूं, एक भजन करना जानूं आशा है आपको यह पसंद आएगा। धन्यवाद

  • 27th Oct 2025

    मोहब्बत बोझ बन!

    मोहब्बत बोझ बन कर ही भले रहती हो काँधों पर,मगर ये बोझ हटता है तो काँधे टूट जाते हैं| वसीम नादिर

  • 27th Oct 2025

    शिखर से शिखर तक!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि, कथाकार एवं उपन्यासकार श्री रामदरश मिश्र जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। मिश्र जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री रामदरश मिश्र जी की यह कविता – 1. मंच पर उपस्थित एक लेखक के बारे मेंदूसरे लेखक ने कहा-ये…

  • 26th Oct 2025

    सलीक़े से अगर तोड़ें !

    सलीक़े से अगर तोड़ें तो काँटे टूट जाते है,मगर अफ़्सोस ये है फूल पहले टूट जाते है| वसीम नादिर

  • 26th Oct 2025

    वो चेहरा बदलता है!

    अजब ज़िद्दी मुसव्विर है ज़रा पहचान की ख़ातिर,मिरी तस्वीर का हर रोज़ वो चेहरा बदलता है| वसीम नादिर

  • 26th Oct 2025

    आईना बदलता है!

    मिरी आँखों को पहली आख़िरी हद है तिरा चेहरा,नहीं मैं वो नहीं जो रोज़ आईना बदलता है| वसीम नादिर

  • 26th Oct 2025

    पिंजरा बदलता है!

    रिहाई मिल तो जाती है परिंदे को मगर इतनी,सफ़ाई की ग़रज़ से जब कभी पिंजरा बदलता है| वसीम नादिर

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