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ज़िंदगी के सताए हुए हैं!
इश्क़ में हम तुम्हें क्या बताएं, किस क़दर चोट खाए हुए हैं,मौत ने हमको बख्शा है लेकिन, ज़िंदगी के सताए हुए हैं|
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जब चली सर्द हवा!
आज दिल की चोटों, दिल टूटने आदि को लेकर कुछ शेर, गीत पंक्तियाँ शेयर करूंगा, शुरुआत जोश मलीहाबादी जी के एक शेर से- दिल की चोटों ने कभी चैन से रहने न दिया,जब चली सर्द हवा, मैंने तुझे याद किया|
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मुझसे इक नज़्म का वादा है!
आज मैं गुलज़ार साहब की एक नज़्म शेयर कर रहा हूँ| एक अलग ही अंदाज़ में बात काही है इसमें गुलज़ार साहब ने, कुछ एहसास, कुछ अनुभव वे कहते हैं कि शायद तभी होंगे जब जीवन की अंतिम घड़ियां सामने हों, कवि की एक अलग तरह की अभिव्यक्ति है यह भी, आखिर कवि तो हमेशा…
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क़हक़हों की अस्लियत!
सिर्फ़ शायर देखता है क़हक़हों की अस्लियत,हर किसी के पास तो ऐसी नज़र होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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आपके टुकड़ों के टुकड़े —
आपके टुकड़ों के टुकड़े कर दिये जायेंगे पर,आपकी ताज़ीम में कोई कसर होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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पत्थरों में चीख़ हर्गिज़—
आज मेरा साथ दो वैसे मुझे मालूम है,पत्थरों में चीख़ हर्गिज़ कारगर होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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उनको ख़बर होगी नहीं!
बूँद टपकी थी मगर वो बूँद – ओ -बारिश और है,ऐसी बारिश की कभी उनको ख़बर होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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इन ठिठुरती उँगलियों को—
इन ठिठुरती उँगलियों को इस लपट पर सेंक लो,धूप अब घर की किसी दीवार पर होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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ऐसे गुज़र होगी नहीं!
पक गई हैं आदतें बातों से सर होंगी नहीं,कोई हंगामा करो ऐसे गुज़र होगी नहीं| दुष्यंत कुमार
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यह श्वान – रवींद्रनाथ ठाकुर
आज, मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया है। मैं अनुवाद के लिए अंग्रेजी में मूल कविताएं सामान्यतः ऑनलाइन उपलब्ध काव्य…