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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 30th Nov 2021

    तो अभी से छोड़ जाओ!

    मेरे हमसफ़र पुराने मेरे अब भी मुंतज़िर हैं,तुम्हें साथ छोड़ना है तो अभी से छोड़ जाओ| अहमद फ़राज़

  • 30th Nov 2021

    उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ!

    वो कहानियाँ अधूरी, जो न हो सकेंगी पूरी,उन्हें मैं भी क्यूँ सुनाऊँ, उन्हें तुम भी क्यूँ सुनाओ| अहमद फ़राज़

  • 30th Nov 2021

    किसी दर्द को जगाओ!

    ये उदासियों के मौसम कहीं रायेगाँ न जाएं,किसी ज़ख़्म को कुरेदो, किसी दर्द को जगाओ| अहमद फ़राज़

  • 30th Nov 2021

    कहीं जाँ से भी न जाओ!

    इन्हीं ख़ुशगुमानियों में कहीं जां से भी न जाओ,वो जो चारागर नहीं है उसे ज़ख़्म क्यूं दिखाओ| अहमद फ़राज़

  • 30th Nov 2021

    तुम हो पहरेदार चमन के!

    श्री उदय प्रताप सिंह जी की एक कविता आज शेयर कर रहा हूँ| उदय प्रताप जी सांसद रहे हैं और जैसी मुझे जानकारी रही है, वे मुलायम सिंह जी के गुरू रहे हैं| मूल रूप से उदय प्रताप जी कवि हैं, सांसद भी बने लेकिन वे राजनैतिक व्यक्ति नहीं हैं| जहां तक मुझे याद है…

  • 29th Nov 2021

    शौक से अपनी नज़र के—

    हम तुम्हारे सामने हैं, फिर तुम्हें डर काहे का,शौक से अपनी नज़र के वार कर दो यार तुम|

  • 29th Nov 2021

    तीर आँखों के!

    तीर आँखों के जिगर के पार कर दो यार तुम,जान मांगो या तो जां को निसार कर दो यार तुम|

  • 29th Nov 2021

    और भी ज़ख़्मों की जगह है!

    इस दिल में अभी और भी ज़ख़्मों की जगह है,अबरू की कटारी को दो, आब और जियादा|

  • 29th Nov 2021

    कि दिल टूट गया!

    वो तेरे प्यार का ग़म, इक बहाना था सनम,अपनी क़िस्मत ही कुछ ऐसी थीकि दिल टूट गया!

  • 29th Nov 2021

    कि तेरा हाल क्या है!

    मेरे टूटे हुए दिल से, कोई तो आज ये पूछेकि तेरा हाल क्या है!

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