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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Dec 2021

    सूरज डूब गया बल्ली भर!

    स्वर्गीय नरेंद्र शर्मा जी जाने माने साहित्यिक गीतकार थे, उन्होंने जहां अनेक साहित्यिक रचनाएं हमें दी हैं, वहीं फिल्मों के लिए भी उन्होंने अनेक मधुर गीत लिखे हैं| जहां तक मुझे याद है रामायण जैसे सीरियलों की तैयारी में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान था| जैसे उनका एक गीत था – ‘ज्योति कलश छलके’, उन्होंने ‘द्रौपदी’,’सुवर्णा’…

  • 11th Dec 2021

    कहो अब तुम कैसे हो!

    हम से न पूछो हिज्र के क़िस्से,अपनी कहो अब तुम कैसे हो| मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    क्यूँ उलझे हो!

    अपने शहर के सब लोगों से,मेरी ख़ातिर क्यूँ उलझे हो | मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    अच्छे क्यूँ लगते हो!

    कौन सी बात है तुम में ऐसी ,इतने अच्छे क्यूँ लगते हो| मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    दरिया से भी गहरे हो!

    मैं दरिया से भी डरता हूँ ,तुम दरिया से भी गहरे हो| मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    क्यूँ जागे हो!

    काश कोई हम से भी पूछे,रात गए तक क्यूँ जागे हो| मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    तेज़ हवा ने मुझ से पूछा!

    तेज़ हवा ने मुझ से पूछा,रेत पे क्या लिखते रहते हो| मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    सोचों में गुम रहते हो!

    इतनी मुद्दत बाद मिले हो,किन सोचों में गुम रहते हो| मोहसिन नक़वी

  • 11th Dec 2021

    मोचीराम!

    स्वर्गीय सुदामा प्रसाद ‘धूमिल’ जी की एक लंबी कविता का एक अंश आज प्रस्तुत कर रहा हूँ| धूमिल जी का अपना अलग ही अन्दाज़ था, आज की उनकी यह कविता उनकी प्रसिद्ध कविताओं में शामिल रही है, जिसमें वे एक मोची के माध्यम से कुछ महत्वपूर्ण बातें कह जाते हैं| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय…

  • 10th Dec 2021

    लक्षण सुबह के हैं!

    मानो न मानो तुम ’उदय’ लक्षण सुबह के हैं,चमकीला तारा कोई नहीं आसमान में। उदय प्रताप सिंह

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