-
मुँह से निकलने नहीं देते!
दिल वो है कि फ़रियाद से लबरेज़ है हर वक़्त,हम वो हैं कि कुछ मुँह से निकलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी
-
अरमान मेरे दिल का—
आँखें मुझे तल्वों से वो मलने नहीं देते,अरमान मेरे दिल का निकलने नहीं देते| अकबर इलाहाबादी
-
आखिर यही होता क्यों है!
भारतीय शायरों में अपनी एक खास पहचान रखने वाले ज़नाब कैफ़ी आज़मी साहब की लिखी एक ग़ज़ल आज शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल को जगजीत सिंह जी ने कुलदीप सिंह जी के संगीत निर्देशन में गाया है और फिल्म ‘अर्थ’ में इसे बड़ी खूबसूरती के साथ फिल्माया गया है| ज़िंदगी में कब कौन और…
-
अँगूठे-सा दंग हूँ!
ये किसका दस्तख़त है, बताए कोई मुझे,मैं अपना नाम लिख के अँगूठे-सा दंग हूँ | सूर्यभानु गुप्त
-
अटकी पतंग हूँ!
माँझा कोई यक़ीन के क़ाबिल नहीं रहा,तनहाइयों के पेड़ से अटकी पतंग हूँ| सूर्यभानु गुप्त