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सारी सड़कें रूठी रूठी लगती हैं!
इक ये दिन जब सारी सड़कें रूठी रूठी लगती हैं, इक वो दिन जब ‘आओ खेलें’ सारी गलियाँ कहती थीं| जावेद अख़्तर
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इक ये दिन जब–
इक ये दिन जब अपनों ने भी हमसे रिश्ता तोड़ लिया, इक वो दिन जब पेड़ की शाख़े बोझ हमारा सहती थीं| जावेद अख़्तर
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मुझको यक़ीं है!
मुझको यक़ीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं, जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं| जावेद अख्तर
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लो चांद निकल आया!
आज एक गीत फिल्म ‘एक बार मुस्कुरा दो’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी और आशा भौंसले जी के मधुर युगल स्वरों में, इसका संगीत तैयार किया है ओ. पी.नैयर जी ने और गीत लिखा था एस एच बिहारी जी ने| आशा जी और मुकेश जी का यह रोमांटिक युगल गीत आज भी हमारे मन…
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चंचल लड़की जैसी मां!
बांट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई|फटे पुराने इक अलबम में, चंचल लड़की जैसी मां| निदा फ़ाज़ली
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चलती नटनी जैसी मां!
बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन,थोड़ी थोड़ी सी सब में|दिन भर इक रस्सी के ऊपर, चलती नटनी जैसी मां| निदा फ़ाज़ली
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मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती!
चिड़ियों के चहकार में गूंजे, राधा-मोहन अली-अली|मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती, घर की कुंडी जैसी मां | निदा फ़ाज़ली
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आधी सोई आधी जागी!
बाँस की खुर्री खाट के ऊपर, हर आहट पर कान धरे|आधी सोई आधी जागी,थकी दोपहरी जैसी मां | निदा फ़ाज़ली
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बेसन की सोंधी रोटी पर!
बेसन की सोंधी रोटी पर, खट्टी चटनी जैसी मां,याद आती है चौका-बासन, चिमटा फुकनी जैसी मां | निदा फ़ाज़ली