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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 17th Jan 2022

    सारी सड़कें रूठी रूठी लगती हैं!

    इक ये दिन जब सारी सड़कें रूठी रूठी लगती हैं, इक वो दिन जब ‘आओ खेलें’ सारी गलियाँ कहती थीं| जावेद अख़्तर

  • 17th Jan 2022

    एक ज़रा सी बात पे नदियाँ बहती थीं!

    इक ये दिन जब लाखों ग़म और काल पड़ा है आँसू का, इक वो दिन जब एक ज़रा सी बात पे नदियाँ बहती थीं| जावेद अख़्तर

  • 17th Jan 2022

    इक ये दिन जब–

    इक ये दिन जब अपनों ने भी हमसे रिश्ता तोड़ लिया, इक वो दिन जब पेड़ की शाख़े बोझ हमारा सहती थीं| जावेद अख़्तर

  • 17th Jan 2022

    मुझको यक़ीं है!

    मुझको यक़ीं है सच कहती थीं जो भी अम्मी कहती थीं, जब मेरे बचपन के दिन थे चाँद में परियाँ रहती थीं| जावेद अख्तर

  • 17th Jan 2022

    लो चांद निकल आया!

    आज एक गीत फिल्म ‘एक बार मुस्कुरा दो’ से, हमारे प्रिय गायक मुकेश जी और आशा भौंसले जी के मधुर युगल स्वरों में, इसका संगीत तैयार किया है ओ. पी.नैयर जी ने और गीत लिखा था एस एच बिहारी जी ने| आशा जी और मुकेश जी का यह रोमांटिक युगल गीत आज भी हमारे मन…

  • 16th Jan 2022

    चंचल लड़की जैसी मां!

    बांट के अपना चेहरा, माथा, आँखें जाने कहाँ गई|फटे पुराने इक अलबम में, चंचल लड़की जैसी मां| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Jan 2022

    चलती नटनी जैसी मां!

    बीवी, बेटी, बहन, पड़ोसन,थोड़ी थोड़ी सी सब में|दिन भर इक रस्सी के ऊपर, चलती नटनी जैसी मां| निदा फ़ाज़ली

  • 16th Jan 2022

    मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती!

    चिड़ियों के चहकार में गूंजे, राधा-मोहन अली-अली|मुर्ग़े की आवाज़ से खुलती, घर की कुंडी जैसी मां | निदा फ़ाज़ली

  • 16th Jan 2022

    आधी सोई आधी जागी!

    बाँस की खुर्री खाट के ऊपर, हर आहट पर कान धरे|आधी सोई आधी जागी,थकी दोपहरी जैसी मां | निदा फ़ाज़ली

  • 16th Jan 2022

    बेसन की सोंधी रोटी पर!

    बेसन की सोंधी रोटी पर, खट्टी चटनी जैसी मां,याद आती है चौका-बासन, चिमटा फुकनी जैसी मां | निदा फ़ाज़ली

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