Skip to content

SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
    • Activity
    • Members
    • Sample Page
    • Sample Page
    • Sample Page
    • About
    • Contact
  • 10th Aug 2022

    शाम से जल जाते हैं!

    गर्मी-ए-हसरत-ए-नाकाम से जल जाते हैं, हम चराग़ों की तरह शाम से जल जाते हैं| क़तील शिफ़ाई

  • 10th Aug 2022

    रोटी का सवाल!

    हिन्दी के प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि श्री अशोक चक्रधर जी की एक प्रभावशाली कविता आज प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसमें भूखे लोगों के बीच एक रोटी का महत्व बताया गया है|लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक चक्रधर जी की यह कविता – कितनी रोटीगाँव में अकाल था,बुरा हाल था।एक बुढ़ऊ नेसमय बिताने को,यों ही पूछामन बहलाने…

  • 9th Aug 2022

    दर्द का रस्ता छोड़ दिया है!

    एक ‘फ़राज़’ तुम्हीं तन्हा हो जो अब तक दुख के रसिया हो, वर्ना अक्सर दिल वालों ने दर्द का रस्ता छोड़ दिया है| अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    मैं भी जिया हूँ वो भी जिया है!

    हिज्र की रुत जाँ-लेवा थी पर ग़लत सभी अंदाज़े निकले, ताज़ा रिफ़ाक़त* के मौसम तक मैं भी जिया हूँ वो भी जिया है|* Companionship अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    उसको क्यूँ बे-ख़्वाब किया है!

    अपना ये शेवा तो नहीं था अपने ग़म औरों को सौंपें, ख़ुद तो जागते या सोते हैं उसको क्यूँ बे-ख़्वाब किया है| अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    और आँखों को मूँद लिया है!

    अब क्या सोचें क्या हालात थे किस कारन ये ज़हर पिया है, हमने उसके शहर को छोड़ा और आँखों को मूँद लिया है| अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    तमन्ना के सराबों में मिलें!

    अब न वो मैं न वो तू है न वो माज़ी है ‘फ़राज़’, जैसे दो शख़्स तमन्ना के सराबों में मिलें| अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें!

    तू ख़ुदा है न मिरा इश्क़ फ़रिश्तों जैसा, दोनों इंसाँ हैं तो क्यूँ इतने हिजाबों में मिलें| अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    शराबें जो शराबों में मिलें!

    ग़म-ए-दुनिया भी ग़म-ए-यार में शामिल कर लो, नश्शा बढ़ता है शराबें जो शराबों में मिलें| अहमद फ़राज़

  • 9th Aug 2022

    मुमकिन है ख़राबों में मिलें

    ढूँढ उजड़े हुए लोगों में वफ़ा के मोती, ये ख़ज़ाने तुझे मुमकिन है ख़राबों में मिलें| अहमद फ़राज़

←Previous Page
1 … 1,173 1,174 1,175 1,176 1,177 … 1,527
Next Page→

Blog at WordPress.com.

Privacy & Cookies: This site uses cookies. By continuing to use this website, you agree to their use.
To find out more, including how to control cookies, see here: Cookie Policy
  • Subscribe Subscribed
    SamaySakshi
    Join 1,136 other subscribers.

    Have a WordPress.com account? Log in now.

  • SamaySakshi
    View site in Reader
    Manage subscriptionsSign upLog in
    Report this content
    Collapse this bar