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हवा, ख़ुश्बू, ज़मीनो-आसमाँ!
सब उसी के हैं हवा, ख़ुश्बू, ज़मीनो-आसमाँ,मैं जहाँ भी जाऊँगा, उसको पता हो जाएगा| बशीर बद्र
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दवा हो जाएगा!
मैं ख़ुदा का नाम लेकर पी रहा हूँ दोस्तो,ज़हर भी इसमें अगर होगा, दवा हो जाएगा| बशीर बद्र
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कोई दूसरा हो जाएगा!
कितनी सच्चाई से मुझसे ज़िन्दगी ने कह दिया,तू नहीं मेरा, तो कोई दूसरा हो जाएगा| बशीर बद्र
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हम भी दरिया हैं!
हम भी दरिया हैं, हमें अपना हुनर मालूम है,जिस तरफ भी चल पड़ेंगे, रास्ता हो जाएगा| बशीर बद्र
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सर झुकाओगे तो पत्थर!
सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,इतना मत चाहो उसे, वो बेवफ़ा हो जाएगा| बशीर बद्र
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ये मुरादों की हसीं रात!
आज साहिर लुधियानवी जी का लिखा एक गीत शेयर कर रहा हूँ, जो 1964 में रिलीज हुई फिल्म- ग़ज़ल से है, जिसके नायक सुनील दत्त जी थे| हम जानते हैं कि विवाह के अवसर पर सेहरा गाया जाता है, खुशी का मौका होने के कारण और भी बहुत से गीत गाए जाते हैं, लेकिन हमारी…