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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 25th Feb 2022

    बिल्डिंगें बांहों की सूरत!

    नगर की बिल्डिंगें बांहों की सूरत,बशर टूटी हुई अंगड़ाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 25th Feb 2022

    हिमगिरि विशाल, गिरिवर विशाल!

    एक बार फिर से मैं आज राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत, राष्ट्र वंदना की रचनाएं लिखने वाले स्वर्गीय सोहनलाल द्विवेदी जी की एक राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत कविता शेयर कर रहा हूँ| उनकी गांधी जी के लिए लिखी गई कविता- ‘चल पड़े जिधर दो डग मग में’ बहुत प्रसिद्ध हुई और राष्ट्रीय स्वाधीनता संग्राम हेतु उन्होंने अपनी…

  • 24th Feb 2022

    गर्दनों पर टाइयां हैं!

    दिलों की बात ओंठों तक न आए,कसी यूँ गर्दनों पर टाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    शहर की रानाइयां हैं!

    गगन-छूते मकां भी, झोपड़े भी,अजब इस शहर की रानाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    हक़ीक़त पर्वतों की राइयां हैं!

    बिके पानी समन्दर के किनारे,हक़ीक़त पर्वतों की राइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    मुलाज़िम झूठ की-

    हवा बिजली के पंखे बांटते हैं,मुलाज़िम झूठ की सच्चाइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    गले मिलिए तो-

    गले मिलिए तो कट जाती हैं जेबें,बड़ी उथली यहां गहराइयां हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    अपनी ही ख़ुद परछाइयाँ हैं!

    है ऐसी तेज़ रफ़्तारी का आलम,कि लोग अपनी ही ख़ुद परछाइयाँ हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    पहाड़ों के क़दों की–

    पहाड़ों के क़दों की खाइयाँ हैं,बुलन्दी पर बहुत नीचाइयाँ हैं| सूर्यभानु गुप्त

  • 24th Feb 2022

    यहां भी है वहां भी!

    आज एक बार फिर से मैं अपने अत्यंत प्रिय शायर ज़नाब निदा फ़ाज़ली साहब की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| इस ग़ज़ल में वास्तव में उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संदर्भ में अपनी बात कही है और बताया है कि धार्मिक उन्माद में बहने वाले लोग इधर भी हैं और उधर भी| जो सज्जन…

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