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बस तेरा नाम ही लिखा देखा!
आज स्वर्गीय सुदर्शन फ़ाकिर जी की एक ग़ज़ल शेयर कर रहा हूँ| सुदर्शन फ़ाकिर जी ने कुछ बहुत सुंदर रचनाएं हमें दी हैं| जगजीत सिंह जी और अन्य अनेक गायकों ने फ़ाकिर जी की रचनाओं को गाया है| लीजिए आज प्रस्तुत है सुदर्शन फ़ाकिर जी की एक बहुत लोकप्रिय और प्रभावशाली ग़ज़ल, इस ग़ज़ल को…
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तौर तरीक़े मुझे कम आते हैं!
मैंने दो चार किताबें तो पढ़ी हैं लेकिन |शहर के तौर तरीक़े मुझे कम आते हैं || *****ख़ूबसूरत सा कोई हादसा आँखों में लिये |घर की दहलीज़ पे डरते हुए हम आते हैं || बशीर बद्र
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कभी चांदी के क़लम आते हैं!
मुझसे क्या बात लिखानी है कि अब मेरे लिये |कभी सोने कभी चांदी के क़लम आते हैं || बशीर बद्र
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सौ अहले करम आते हैं!
दिल वो दरवेश है जो आँख उठाता ही नहीं |इस के दरवाज़े पे सौ अहले करम आते हैं || बशीर बद्र
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बहुत तेज़ क़दम आते हैं !
कोई लश्कर है के बढ़ते हुए ग़म आते हैं |शाम के साये बहुत तेज़ क़दम आते हैं || बशीर बद्र
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हज़ारों साल की कोई इमारत सी!
उदासी पतझड़ों की शाम ओढ़े रास्ता तकती |पहाड़ी पर हज़ारों साल की कोई इमारत सी || बशीर बद्र