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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Mar 2022

    दरिया में बहा दें यादें!

    काश मुमकिन हो कि इक काग़ज़ी कश्ती की तरह,ख़ुदफरामोशी के दरिया में बहा दें यादें| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    दुःख याद दिला दें यादें!

    जिस तरह आज ही बिछड़े हों बिछड़ने वाले,जैसे इक उम्र के दुःख याद दिला दें यादें| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    और वही यादें-यादें!

    आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दें यादें,ज़िंदगी बीत गई और वही यादें-यादें| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़!

    कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़,क्या गंवाया है क्या मिला है मुझे| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    क्या मिला है मुझे!

    कौन जाने कि चाहतो में फ़राज़,क्या गंवाया है क्या मिला है मुझे| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    हौसला है मुझे!

    तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल,हार जाने का हौसला है मुझे| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे!

    हमसफ़र चाहिये हुजूम नहीं,इक मुसाफ़िर भी काफ़िला है मुझे| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    देर से मिला है मुझे!

    ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे,तू बहुत देर से मिला है मुझे| अहमद फ़राज़

  • 11th Mar 2022

    तू है जहाँ, वहाँ आ पाना!

    आज स्वर्गीय रामस्वरूप सिंदूर जी का एक सुंदर गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ| काव्य रचनाएं स्वयं अपना परिचय देती हैं, वैसे गीत अधिकतर भावुकता का ही व्यापार होते हैं, जैसे नीरज जी ने भी लिखा था- ‘हूँ बहुत नादान करता हूँ ये नादानी, बेचकर खुशियां खरीदूँ आँख का पानी’| खैर आज आप इस गीत में…

  • 10th Mar 2022

    अपने सुख़न में ढलते हैं!

    तुम बनो रंग, तुम बनो ख़ुशबू,हम तो अपने सुख़न में ढलते हैं| जॉन एलिया

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