-
भीगी पलकें न झुका!
एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट और मुकेश जी का एक प्यारा गीत, एक बार और! आज मुझे मेरे प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक बहुत सुंदर गीत याद आ रहा है | फिल्म- साथी के लिए इस गीत को लिखा था मजरूह सुल्तानपुरी साहब ने और इसका संगीत दिया था- नौशाद साहब ने| कुल…
-
अब के बरस भी यहीं से निकलेगा!
गुज़िश्ता साल के ज़ख़्मो हरे-भरे रहना, जुलूस अब के बरस भी यहीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी
-
डूबेगा सूरज वहीं से निकलेगा!
बुज़ुर्ग कहते थे इक वक़्त आएगा जिस दिन, जहाँ पे डूबेगा सूरज वहीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी
-
ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा!
इसी गली में वो भूखा फ़क़ीर रहता था, तलाश कीजे ख़ज़ाना यहीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी
-
ख़ुलूस मिरी आस्तीं से निकलेगा!
मैं जानता था कि ज़हरीला साँप बन बन कर, तिरा ख़ुलूस मिरी आस्तीं से निकलेगा| राहत इन्दौरी