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मुझको मोहब्बत कहाँ कहाँ!
आई है कुछ न पूछ क़यामत कहाँ कहाँ, उफ़ ले गई है मुझको मोहब्बत कहाँ कहाँ| फ़िराक़ गोरखपुरी
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मूल्य दे सुख के क्षणों का!
आज एक बार फिर मैं प्रसिद्ध आधुनिक हिन्दी कवि, सीनियर बच्चन जी की एक सुंदर रचना शेयर कर रहा हूँ| स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन जी किसी जमाने में हिन्दी काव्य मंचों की शान हुआ करते थे, उनको सुनने के लिए श्रोतागण दूर-दूर से कवि सम्मेलनों में आते थे| मैंने पहले भी बच्चन जी के बहुत से…
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नींद चुराने वाली- रवींद्रनाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…