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मरण-मिलन (मृत्यु-विवाह)- रवींद्र नाथ ठाकुर
आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर जी की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया…
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मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ!
हिन्दी काव्य मंचों पर अपने समय के एक लोकप्रिय कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी का यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था- बदनाम रहे बटमार मगर, घर तो रखवालों ने लूटा,मेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा| इसके अलावा फिल्मों के लिए लिखे…
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ये डगर कुछ और ही है!
आपके रस्ते हैं आसाँ आपकी मंजिल क़रीब,ये डगर कुछ और ही है जिस डगर जाता हूँ मैं| राजेश रेड्डी