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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 4th Apr 2022

    मेरे नाम का बादल भेजो न!

    धूप बहुत है मौसम जल-थल भेजो न,बाबा मेरे नाम का बादल भेजो न| राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    मरण-मिलन (मृत्यु-विवाह)- रवींद्र नाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर जी की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद प्रस्तुत किया गया…

  • 3rd Apr 2022

    इक दर्द से दो-चार होगा!

    वो निकला है फिर इक उम्मीद लेकर,वो फिर इक दर्द से दो-चार होगा| राजेश रेड्डी

  • 3rd Apr 2022

    वहाँ मझधार होगा!

    समझ जाते हैं दरिया के मुसाफ़िर,जहाँ में हूँ वहाँ मझधार होगा| राजेश रेड्डी

  • 3rd Apr 2022

    साहिबे-किरदार होगा!

    उसे नाकामियाँ ख़ुद ढूँढ लेंगी,यहाँ जो साहिबे-किरदार होगा| राजेश रेड्डी

  • 3rd Apr 2022

    सामने अख़बार होगा!

    बदल जाएगी इस बच्चे की दुनिया,जब इसके सामने अख़बार होगा| राजेश रेड्डी

  • 3rd Apr 2022

    कल कोई त्योहार होगा!

    ये सारे शहर में दहशत-सी क्यों हैं,यक़ीनन कल कोई त्योहार होगा| राजेश रेड्डी

  • 3rd Apr 2022

    रेत का अंबार होगा!

    ख़ज़ाना कौन सा उस पार होगा,वहाँ भी रेत का अंबार होगा| राजेश रेड्डी

  • 3rd Apr 2022

    मैं विद्युत् में तुम्हें निहारूँ!

    हिन्दी काव्य मंचों पर अपने समय के एक लोकप्रिय कवि स्वर्गीय गोपाल सिंह नेपाली जी की एक रचना आज शेयर कर रहा हूँ| नेपाली जी का यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ था- बदनाम रहे बटमार मगर, घर तो रखवालों ने लूटा,मेरी दुल्हन-सी रातों को, नौ लाख सितारों ने लूटा| इसके अलावा फिल्मों के लिए लिखे…

  • 2nd Apr 2022

    ये डगर कुछ और ही है!

    आपके रस्ते हैं आसाँ आपकी मंजिल क़रीब,ये डगर कुछ और ही है जिस डगर जाता हूँ मैं| राजेश रेड्डी

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