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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 5th Apr 2022

    हाथ मेरा खुरदरा हुआ!

    गिन गिन के सिक्के हाथ मेरा खुरदरा हुआ,जाती रही वो लम्स* की नर्मी, बुरा हुआ|(लम्स – स्पर्श) जावेद अख़्तर

  • 5th Apr 2022

    हार न अपनी मानूँगा मैं !

    आज एक बार फिर से मैं हिन्दी काव्य मंचों पर गीतों के राजकुंवर के नाम से जिनको जाना जाता था, ऐसे स्वर्गीय गोपाल दास नीरज जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| नीरज जी जहां कवि सम्मेलनों में श्रोताओं का मन मोह लेते थे, वहीं हमारी हिन्दी फिल्मों में भी उन्होंने बहुत यादगार गीत…

  • 4th Apr 2022

    सफारी पहन के आते हैं!

    इबादतों की हिफाज़त भी उनके जिम्मे है,जो मस्जिदों में सफारी पहन के आते हैं। राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    मदारी पहन के आते हैं!

    यही अकीक़ थे शाहों के ताज की जीनत,जो उँगलियों में मदारी पहन के आते हैं। राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    भिखारी पहन के आते हैं!

    अमीर ए शहर तेरे जैसी क़ीमती पोशाक,मेरी गली में भिखारी पहन के आते हैं। राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    कोई पागल भेजो न!

    मैं बस्ती में आख़िर किस से बात करूँ,मेरे जैसा कोई पागल भेजो न| राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    धूप का संदल भेजो न!

    सारे मौसम एक उमस के आदी हैं,छाँव की ख़ुश्बू, धूप का संदल भेजो न| राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    बाज़ारों की हलचल भेजो न!

    बस्ती बस्ती दहशत किसने बो दी है,गलियों बाज़ारों की हलचल भेजो न| राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    पैरों की पायल भेजो न!

    नन्ही मुन्नी सब चेहकारें कहाँ गईं,मोरों के पैरों की पायल भेजो न| राहत इन्दौरी

  • 4th Apr 2022

    केसरया आँचल भेजो न!

    मोल्सरी की शाख़ों पर भी दिये जलें,शाख़ों का केसरया आँचल भेजो न| राहत इन्दौरी

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