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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 12th Oct 2022

    तुमने गुज़ारी रात कहाँ!

    ऐ आवारा यादो फिर ये फ़ुर्सत के लम्हात कहाँ, हमने तो सहरा में बसर की तुमने गुज़ारी रात कहाँ| राही मासूम रज़ा

  • 12th Oct 2022

    मुफ्त हुए बदनाम!!

    एक बार फिर से मैं एक पुरानी ब्लॉग पोस्ट दोहरा रहा रहा हूँ, जो मेरे प्रिय गायक मुकेश जी का गाया हुआ एक अमर गीत है| आज मैं अपने प्रिय गायक स्वर्गीय मुकेश जी का गाया एक गीत शेयर कर रहा हूँ| मेरा मानना है की मुकेश जी का गाया लगभग हर गीत अमर है|…

  • 11th Oct 2022

    जी भर के देखा न कुछ बात की!

    न जी भर के देखा न कुछ बात की, बड़ी आरज़ू थी मुलाक़ात की| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    रहे सामने और दिखाई न दे!

    ख़ुदा ऐसे एहसास का नाम है, रहे सामने और दिखाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    असीरों को ऐसी रिहाई न दे!

    ग़ुलामी को बरकत समझने लगें, असीरों को ऐसी रिहाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    सदा सिसकियों की सुनाई न दे!

    हँसो आज इतना कि इस शोर में, सदा सिसकियों की सुनाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे!

    ख़ता-वार समझेगी दुनिया तुझे, अब इतनी ज़ियादा सफ़ाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    अपने सिवा कुछ दिखाई न दे!

    ख़ुदा हमको ऐसी ख़ुदाई न दे, कि अपने सिवा कुछ दिखाई न दे| बशीर बद्र

  • 11th Oct 2022

    किसने बाँसुरी बजाई!

    आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि एवं नवगीतकार स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की एक रचना, शेयर कर रहा हूँ| इनको साहित्य के क्षेत्र में अनेक सम्मानों के साथ ही पद्मश्री सम्मान देने की भी पेशकश की गई थी जिसको उन्होंने अस्वीकार कर दिया था| लीजिए, प्रस्तुत है स्वर्गीय जानकीवल्लभ शास्त्री जी की यह रचना-…

  • 10th Oct 2022

    हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा!

    किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल, कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा| अहमद फ़राज़

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