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इक तार कहीं से टूट गया!
इस नग़्मा-तराज़-ए-गुलशन ने तोड़ा है कुछ ऐसा साज़-ए-दिल,इक तार कहीं से टूट गया इक तार कहीं से टूट गया| शमीम जयपुरी
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पैवस्त हुआ और टूट गया!
क्या शय थी किसी की पहली नज़र कुछ इसके अलावा याद नहीं,इक तीर सा दिल में जैसे लगा पैवस्त हुआ और टूट गया| शमीम जयपुरी
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आया हुआ दामन छूट गया!
जब दिल को सुकूँ ही रास न हो फिर किससे गिला नाकामी का,हर बार किसी का हाथों में आया हुआ दामन छूट गया| शमीम जयपुरी
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इक दिल था वो भी टूट गया!
दुनिया-ए-मोहब्बत में हमसे हर अपना पराया छूट गया,अब क्या है जिस पर नाज़ करें, इक दिल था वो भी टूट गया| शमीम जयपुरी
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कभी तोड़ दिए जाते हैं!
आबगीनों की तरह दिल हैं ग़रीबों के ‘शमीम’ ,टूट जाते हैं कभी तोड़ दिए जाते हैं| शमीम जयपुरी
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जो ज़हर पिए जाते हैं!
अपनी तारीख़-ए-मोहब्बत के वही हैं सुक़रात, हँस के हर साँस पे जो ज़हर पिए जाते हैं| शमीम जयपुरी
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सर-आँखों पे लिए जाते हैं!
उनके क़दमों पे न रख सर, के है ये बे-अदबी, पा-ए-नाज़ुक तो सर-आँखों पे लिए जाते हैं| शमीम जयपुरी
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आँसू भी पिए जाते हैं!
नश्शा दोनों में है साक़ी मुझे ग़म दे के शराब, मय भी पी जाती है, आँसू भी पिए जाते हैं| शमीम जयपुरी
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‘हाला’- बच्चन जी की मधुबाला से
आज स्वर्गीय हरिवंश राय बच्चन जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ| बच्चन जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं और उनके बारे में काफी बातें भी की हैं| एक घटना जो मुझे अक्सर याद आती है वह है आकाशवाणी, नई दिल्ली में श्रीमती कमला शास्त्री द्वारा लिया गया बच्चन…