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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th May 2022

    मुझे निकाल के पत्थर बना दिया!

    मुझसे मुझे निकाल के पत्थर बना दिया,जब मैं नहीं रहा हूँ तो पूजा गया हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली

  • 9th May 2022

    आप तमाशा रहा हूँ मैं!

    देखा गया हूँ मैं कभी सोचा गया हूँ मैं,अपनी नज़र में आप तमाशा रहा हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली

  • 9th May 2022

    अवशिष्ट !

    आज एक बार फिर मैं हिन्दी साहित्य की सभी विधाओं में अपना बहुमूल्य योगदान करने वाले और धर्मयुग पत्रिका के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ | लीजिए आज प्रस्तुत है, जीवन पर एक अलग प्रकार की दृष्टि डालने वाला स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी का यह गीत…

  • 8th May 2022

    बैठ के अपने यारों में!

    सब का दिल हो अपने जैसा अनहोनी सी बात लगे,’नक़्श’ यह क्या सोचा करते हो बैठ के अपने यारों में। नक़्श लायलपुरी

  • 8th May 2022

    इश्क़ ने जब जब रक़्स किया है!

    काँप उठे हैं शाहों के दिल, महलों की बुनियाद हिली,इश्क़ ने जब जब रक़्स किया है शाहों के दरबारों में। नक़्श लायलपुरी

  • 8th May 2022

    बस्ती के चौबारों में!

    हर पनघट पर मेरे फ़साने, चौपालों पर ज़िक्र मेरा,मेरी ही बातें होती हैं बस्ती के चौबारों में। नक़्श लायलपुरी

  • 8th May 2022

    इतना दर्द कहाँ से आया!

    गीत है या फ़रियाद किसी की, नग़मा है या दिल की तड़प,इतना दर्द कहाँ से आया साज़ों की झंकारों में। नक़्श लायलपुरी

  • 8th May 2022

    चाँदी जैसी लहरें गिरती!

    जाने कितनी नदियों को धनवान बनाया झरनों ने,चाँदी जैसी लहरें गिरती देखी हैं कोहसारों में। नक़्श लायलपुरी

  • 8th May 2022

    मुझको चुनवा दो दीवारों में!

    लोग मुझे पागल कहते हैं गलियों में बाज़ारों में।मैंने प्यार किया है मुझको चुनवा दो दीवारों में। नक़्श लायलपुरी

  • 8th May 2022

    इक कली खिल गई एक मुरझा गई!

    मौत और ज़िन्दगी क्या हैं इसके सिवा,इक कली खिल गई एक मुरझा गई। नक़्श लायलपुरी

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