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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 10th May 2022

    दुनियादारों का है मौला खैर!

    दुनिया से बाहर भी निकलकर देख चुके,सब कुछ दुनियादारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    रिश्तेदारों का है मौला खैर!

    इस दुनिया में तेरे बाद मेरे सर पर,साया रिश्तेदारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    यारों का है मौला खैर!

    दुश्मन से तो टक्कर ली है सौ-सौ बार,सामना अबके यारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    बोझ अँधियारों का है मौला खैर!

    सर पर बोझ अँधियारों का है मौला खैर,और सफ़र कोहसारों का है मौला खैर| राहत इन्दौरी

  • 10th May 2022

    गीत के जितने कफ़न हैं!

    एक बार फिर मैं आज मेरे लिए गुरुतुल्य और बड़े भाई जैसे रहे, श्रेष्ठ रचनाकार और अत्यंत सरल हृदय गीतकार स्वर्गीय डॉक्टर कुँवर बेचैन जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| इस गीत में भी डॉक्टर बेचैन जी ने जीवन पर एक अलग तरीके से निगाह डाली है| लीजिए आज प्रस्तुत है, जीवन पर…

  • 9th May 2022

    ये आइना किसलिए!

    एक ही थी सुकूँ की जगह, घर में ये आइना किसलिए| निदा फ़ाज़ली

  • 9th May 2022

    आसमाँ पर खुदा किसलिए!

    काम तो हैं ज़मीं पर बहुत,आसमाँ पर खुदा किसलिए| निदा फ़ाज़ली

  • 9th May 2022

    गिला किसलिए!

    जो हुआ वो हुआ किसलिए,हो गया तो गिला किसलिए| निदा फ़ाज़ली

  • 9th May 2022

    गुम हो गया हूँ मैं!

    ऊपर के चेहरे-मोहरे से धोखा न खाइए,मेरी तलाश कीजिए, गुम हो गया हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली

  • 9th May 2022

    बिखरता रहा हूँ मैं!

    मैं मौसमों के जाल में जकड़ा हुआ दरख़्त,उगने के साथ-साथ बिखरता रहा हूँ मैं| निदा फ़ाज़ली

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