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लहरों से टकराती तो है!
इस नदी की धार से ठंडी हवा आती तो है,नाव जर्जर ही सही, लहरों से टकराती तो है| दुष्यंत कुमार
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इतने बरसों बाद!
आज मैं हिन्दी के एक श्रेष्ठ कवि और गीतकार श्री अनूप अशेष जी का एक नवगीत शेयर कर रहा हूँ| लंबे समय तक बरसात को तरसने के बाद जब गाँव देहात में बारिश होती है तो सबके मन को सरसा जाती है, कृषक परिवारों के मन में एक नया उल्लास आ जाता है| यह गीत…
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हवा का गुज़र नहीं होता!
मैं उस मकान में रहता हूँ और ज़िंदा हूँ,‘वसीम’ जिसमें हवा का गुज़र नहीं होता। वसीम बरेलवी
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कुछ सूखे फूलों के गुलदस्ते!
स्वर्गीय भवानी प्रसाद मिश्र जी अपनी किस्म के अनूठे कवि थे| बातचीत के लहज़े में कविता कहने का उनका निराला अंदाज़ था| मैंने पहले भी भवानी दादा की कुछ कविताएं शेयर की हैं|लीजिए आज प्रस्तुत है, हमारे भवानी दादा की यह कविता, जिसमें अभिव्यक्ति का एक अनूठा उदाहरण मिलता है – कुछ सूखे फूलों केगुलदस्तों…