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मुझ पे जो गुज़र जाए!
मेरे नग़्मों से उन का दिल न दुखे,ग़म नहीं मुझ पे जो गुज़र जाए| जाँ निसार अख़्तर
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चांद आहें भरेगा!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से मैं आज अपने स्वर में मुकेश जी का यह गीत शेयर कर रहा हूँ- चांद आहें भरेगा, फूल दिल थाम लेंगे, हुस्न की बात चली तब, सब तेरा नाम लेंगे आशा है आपको यह पसंद आएगा।आपसे यह भी अनुरोध है कि मेरे यूट्यूब चैनल को सब्स्क्राइब करें। youtube.com/@kris230450धन्यवाद। *******
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पूर्वजों की अस्थियों में!
आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि श्री अशोक वाजपेयी जी की एक रचना प्रस्तुत कर रहा हूँ। वाजपेयी जी की बहुत सी रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है श्री अशोक वाजपेयी जी की यह कविता – हम अपने पूर्वजों की अस्थियों में रहते हैं- हम उठाते हैं एक शब्दऔर किसी पिछली…
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यही तो एक शिकायत!
यही तो एक शिकायत सफ़र में रहती है, हवा-ए-गर्द मुसलसल नज़र में रहती है| आबिद जाफ़री