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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 9th May 2026

    दिल-ए-नादां तुझे!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज में अपने स्वर में मिर्ज़ा ग़ालिब जी की ग़ज़ल के कुछ शेर प्रस्तुत कर रहा हूँ, इसे जगजीत सिंह जी ने और कई गायकों ने गाया है- दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है! आशा है आप्को यह पसंद आएगा, धन्यवाद। *******

  • 9th May 2026

    दूसरी दवा ही नहीं!

    याद है जो उसी को याद करो,हिज्र की दूसरी दवा ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 9th May 2026

    आपकी याद आती रही रात भर!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में फिल्म- गमन का एक गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे मकदूम मोहिउद्दीन जी ने लिखा था, संगीतकार थे जयदेव जी और छाया गांगुली जी ने गाया था- आपकी याद आती रही रात भर! आशा है आपको यह पसंद आएगा,धन्यवाद। *****

  • 9th May 2026

    जब ग़ज़ल होती थी!

    आज मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय भारत यायावर जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। यायावर जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय भारत यायावर जी की यह कविता – उर्दू में ग़ज़ल का बाज़ार हुआ करता थातरह – तरह की ग़ज़लों से दुकान सजी रहती…

  • 8th May 2026

    बोलता ही नहीं!

    यार तुम को कहाँ कहाँ ढूँडा,जाओ तुम से मैं बोलता ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 8th May 2026

    और कोई था ही नहीं!

    रात भी हम ने ही सदारत की,बज़्म में और कोई था ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

  • 8th May 2026

    कांपती लौ ये सियाही!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं नीरज जी का एक और मुक्तक प्रस्तुत कर रहा हूँ- कांपती लौ ये सियाही ये धुआं ये काजल! आशा है आपको ये पसंद आएगा,धन्यवाद । ********

  • 8th May 2026

    ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं शकील बदायुनी जी की एक खूबसूरत ग़ज़ल प्रस्तुत कर रहा हूँ जिसे बेग़म अख़्तर जी ने गाकर अमर कर दिया है- ऐ मोहब्बत तेरे अंजाम पे रोना आया! आशा है आपको यह पसंद आएगी,धन्यवाद। ******

  • 8th May 2026

    जागो मन के सजग पथिक ओ!

    आज मैं विख्यात आंचलिक कथाकार और हिंदी कवि स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। रेणु जी की कुछ रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय फणीश्वर नाथ रेणु जी की यह कविता – मेरे मन के आसमान में पंख पसारेउड़ते रहते अथक पखेरू प्यारे-प्यारे!मन…

  • 7th May 2026

    शेर ताज़ा कोई

    कल से मसरूफ़-ए-ख़ैरियत मैं हूँ,शेर ताज़ा कोई हुआ ही नहीं| फ़हमी बदायूनी

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