-
हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे!
अँधेरे चारों तरफ़ सायं-सायं करने लगे,चिराग़ हाथ उठाकर दुआएँ करने लगे| राहत इन्दौरी
-
मंगल विलय!
एक बार फिर से आज मैं श्री सोम ठाकुर जी का एक गीत शेयर कर रहा हूँ, सोम ठाकुर जी के बहुत से गीत मैंने पहले भी शेयर किए हैं| मूलतः वे प्रेम के गीतकार हैं और उनके प्रेम का दायरा इतना बड़ा है कि उसमें राष्ट्र प्रेम, भाषा प्रेम सभी शामिल हो जाते हैं…
-
घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या!
घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,आँधियाँ भी पगली है बर्क भी दिवानी है| कैफ़ भोपाली
-
तुझे भी काट गिराया लोगों ने!
तेरी लटों में सो लेते थे बे-घर आशिक बे-घर लोग,बूढ़े बरगद आज तुझे भी काट गिराया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
-
ऐब लगाया लोगों ने!
तेरी गली में आ निकले थे दोष हमारा इतना था,पत्थर मारे, तोहमत बाँधी, ऐब लगाया लोगों ने| कैफ़ भोपाली
-
क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने!
हम को दीवाना जान के क्या क्या जुल्म न ढाया लोगों ने,दीन छुड़ाया, धर्म छुड़ाया, देस छुड़ाया लोगो ने| कैफ़ भोपाली