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A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 11th Dec 2022

    वो चाँदनी का बदन!

    वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है, बहुत अज़ीज़ हमें है मगर पराया है| बशीर बद्र

  • 11th Dec 2022

    यहीं रहती थी वह- रवींद्रनाथ ठाकुर

    आज फिर से पुरानी ब्लॉग पोस्ट को दोहराने का दिन है, लीजिए प्रस्तुत है यह पोस्ट| आज मैं फिर से भारत के नोबल पुरस्कार विजेता कवि गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक और कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित जिस कविता का भावानुवाद है, उसे अनुवाद के बाद…

  • 10th Dec 2022

    उड़ रही है लुटी महफ़िलों की धूल!

    आँखों में उड़ रही है लुटी महफ़िलों की धूल, इबरत-सरा-ए-दहर है और हम हैं दोस्तो| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    पिछ्ला पहर है और हम हैं दोस्तो!

    शाम-ए-अलम ढली तो चली दर्द की हवा, रातों की पिछ्ला पहर है और हम हैं दोस्तो| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    आवारगी की लहर है!

    फिरते हैं मिस्ल-ए-मौज-ए-हुआ शहर शहर में, आवारगी की लहर है और हम हैं दोस्तो| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    रुत का क़हर है और हम हैं दोस्तो!

    लाई है अब उड़ा के गए मौसमों की बास, बरखा की रुत का क़हर है और हम हैं दोस्तो| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    ज़हर है और हम हैं दोस्तो!

    ये अजनबी सी मंज़िलें और रफ़्तगाँ की याद, तन्हाइयों का ज़हर है और हम हैं दोस्तो| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    शहर है और हम हैं दोस्तो!

    अश्क-ए-रवाँ की नहर है और हम हैं दोस्तो, उस बेवफ़ा का शहर है और हम हैं दोस्तो| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    तख़्त ख़ाली रहा नहीं करता!

    एक वारिस हमेशा होता है, तख़्त ख़ाली रहा नहीं करता| मुनीर नियाज़ी

  • 10th Dec 2022

    तू किसी का कहा नहीं करता!

    जी में आए जो कर गुज़रता है, तू किसी का कहा नहीं करता| मुनीर नियाज़ी

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