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आदमी का आकाश!
लीजिए आज एक बार फिर से स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रामावतार त्यागी जी की कविताओं में खुद्दारी और आत्मविश्वास विशेष रूप से झलकते थे| उनकी एक पंक्ति जिसे अक्सर उद्धृत किया जाता है, वह है- ‘हमें हस्ताक्षर करना न आया चेक पर माना, मगर दिल पर बड़ी कारीगरी…
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कुछ सुनूँ मैं तेरी ज़बानी भी!
ख़ल्क़* क्या-क्या मुझे नहीं कहतीकुछ सुनूँ मैं तेरी ज़बानी भी।*दुनिया फ़िराक़ गोरखपुरी
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तोड़ो !
आज स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रघुवीर सहाय जी ने अज्ञेय जी के बाद प्रतिष्ठित साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादन का गुरुतर दायित्व संभाला था और लंबे समय तक उस पत्रिका का श्रेष्ठ संपादन किया था|श्री रघुवीर सहाय जी उन कवियों में से एक थे जो कविता में…
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उस हाल में जीना लाज़िम है!
वह मर्द नहीं जो डर जाए, माहौल के ख़ूनी मंज़र से,उस हाल में जीना लाज़िम है, जिस हाल में जीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी