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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 26th Jun 2022

    हो गयी वो नज़र सयानी भी!

    अपनी मासूमियों के पर्दे मेंहो गयी वो नज़र सयानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 26th Jun 2022

    आदमी का आकाश!

    लीजिए आज एक बार फिर से स्वर्गीय रामावतार त्यागी जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रामावतार त्यागी जी की कविताओं में खुद्दारी और आत्मविश्वास विशेष रूप से झलकते थे| उनकी एक पंक्ति जिसे अक्सर उद्धृत किया जाता है, वह है- ‘हमें हस्ताक्षर करना न आया चेक पर माना, मगर दिल पर बड़ी कारीगरी…

  • 25th Jun 2022

    आये तारीख़े-इश्क़ में सौ बार!

    आये तारीख़े-इश्क़ में सौ बारमौत के दौरे-दरम्यानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 25th Jun 2022

    कुछ सुनूँ मैं तेरी ज़बानी भी!

    ख़ल्क़* क्या-क्या मुझे नहीं कहतीकुछ सुनूँ मैं तेरी ज़बानी भी।*दुनिया फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 25th Jun 2022

    निगाहों की बदगुमानी भी!

    लाख हुस्ने-यक़ीं से बढ़कर हैउन निगाहों की बदगुमानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 25th Jun 2022

    ज़िन्दगी आग भी है पानी भी!

    दिल को शोलों से करती है सेराब,ज़िन्दगी आग भी है पानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 25th Jun 2022

    बलायें थीं आसमानी भी!

    दिल को अपने भी ग़म थे दुनिया में,कुछ बलायें थीं आसमानी भी। फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 25th Jun 2022

    क्या चीज है जवानी भी!

    रात भी नींद भी कहानी भी,हाय, क्या चीज है जवानी भी| फ़िराक़ गोरखपुरी

  • 25th Jun 2022

    तोड़ो !

    आज स्वर्गीय रघुवीर सहाय जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| रघुवीर सहाय जी ने अज्ञेय जी के बाद प्रतिष्ठित साप्ताहिक समाचार पत्रिका ‘दिनमान’ के संपादन का गुरुतर दायित्व संभाला था और लंबे समय तक उस पत्रिका का श्रेष्ठ संपादन किया था|श्री रघुवीर सहाय जी उन कवियों में से एक थे जो कविता में…

  • 24th Jun 2022

    उस हाल में जीना लाज़िम है!

    वह मर्द नहीं जो डर जाए, माहौल के ख़ूनी मंज़र से,उस हाल में जीना लाज़िम है, जिस हाल में जीना मुश्किल है| अर्श मलसियानी

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