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राम करे ऐसा हो जाए!
अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं अपने स्वर में मिलन फिल्म का यह प्रसिद्ध गीत शेयर कर रहा हूँ जिसे मुकेश जी ने गाया था – राम करे ऐसा हो जाए, मेरी निंदिया तोहे मिल जाए,मैं जागूं, तू सो जाए। आशा है आपको यह गीत पसंद आएगाधन्यवाद। ********
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रंग है न पानी है!
‘कैफ़’ तुझ को दुनिया ने क्या से क्या बना डाला,यार अब तिरे मुँह पर रंग है न पानी है| कैफ़ भोपाली
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जॉर्जेट के पल्ले सी!
आज एक बार फिर से मैं एक पुरानी पोस्ट दोहरा रहा हूँ। बहुत बार लोग कविता लिखते हैं मौसम पर, कुछ कविताएं बहुत अच्छी भी लिखी जाती हैं। तुलसीदास जी ने, जब रामचंद्र जी, माता सीता की खोज में लगे थे, उस समय ऋतुओं के बदलने का बहुत सुंदर वर्णन किया है। पूरा मनोविज्ञान भरा…
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पूछते हो क्या बाबा!
पूछते हो क्या बाबा क्या हुआ दिल-ए-ज़िंदा,वो मिरा दिल-ए-ज़िंदा आज आँ-जहानी है| कैफ़ भोपाली
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आज मेरे अश्कों का!
शायद उन के दामन ने पोंछ दीं मिरी आँखें,आज मेरे अश्कों का रंग ज़ाफ़रानी है| कैफ़ भोपाली
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आँधियाँ भी पगली हैं!
घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,आँधियाँ भी पगली हैं बर्क़ भी दिवानी है| कैफ़ भोपाली
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दिल पे हुक्मरानी है!
इस तरह मोहब्बत में दिल पे हुक्मरानी है,दिल नहीं मिरा गोया उन की राजधानी है| कैफ़ भोपाली