-
घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार!
दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार,तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार| गोपाल दास नीरज
-
हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार!
टी.वी.ने हम पर किया यूँ छुप-छुप कर वार,संस्कृति सब घायल हुई बिना तीर-तलवार| गोपाल दास नीरज
-
व्यक्ति वहाँ खुद जाए!
जहाँ मरण जिसका लिखा वो बानक बन आए,मृत्यु नहीं जाये कहीं, व्यक्ति वहाँ खुद जाए| गोपाल दास नीरज
-
गागर में सागर, मुँदरी में नवरत्न!
गागर में सागर भरे मुँदरी में नवरत्न,अगर न ये दोहा करे, है सब व्यर्थ प्रयत्न| गोपाल दास नीरज
-
भूख न जाने शर्म!
भूखा पेट न जानता क्या है धर्म-अधर्म,बेच देय संतान तक, भूख न जाने शर्म| गोपाल दास नीरज
-
पालिश करें वे भविष्य के फूल!
जिनको जाना था यहाँ पढ़ने को स्कूल,जूतों पर पालिश करें वे भविष्य के फूल| गोपाल दास नीरज
-
सृजन का शब्द !
लीजिए आज एक बार फिर से प्रस्तुत है श्रेष्ठ कवि, कथाकार, उपन्यासकार, निबंध एवं संस्मरण लेखक और धर्मयुग के यशस्वी संपादक रहे स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की एक कविता| भारती जी ने इन सभी क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई थी| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय धर्मवीर भारती जी की यह कविता– आरम्भ में केवल…