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SamaySakshi

A sky full of cotton beads like clouds

    • 81. सरेआम अमानवीयता
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  • 13th Nov 2025

    जो पारसा हो तो!

    जो पारसा हो तो क्यूँ इम्तिहाँ से डरते हो,हम ए’तिबार का मीज़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    हम उस निगाह का!

    ये ज़ख़्म-ए-दिल नहीं एहसान की निशानी है,हम उस निगाह का एहसान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    झुलसते ख़्वाबों की!

    हमारे पास फ़क़त धूप है ख़यालों की,झुलसते ख़्वाबों की दुक्कान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    इन आँसुओं का कोई!

    इन आँसुओं का कोई क़द्र-दान मिल जाए,कि हम भी ‘मीर’ का दीवान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    कि आप आइना!

    जवाब दे न सकेगा हमारी बातों का,कि आप आइना हैरान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    दीवानों से ये मत पूछो!

    अपने यूट्यूब चैनल के माध्यम से आज मैं मुकेश जी का गाया ये अत्यंत लोकप्रिय गीत प्रस्तुत कर रहा हूँ- दीवानों से ये मत पूछो, दीवानों पे क्या गुज़री है! आशा है आपको ये पसंद आएगा,धन्यवाद। ******

  • 13th Nov 2025

    तूफ़ान ले के आए हैं!

    हवा ने वार किया तो जवाब पाएगी,कि हम चराग़ भी तूफ़ान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 13th Nov 2025

    दिन बौने हो गये!

    आज एक बार फिर मैं श्रेष्ठ हिंदी कवि स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी की एक रचना शेयर कर रहा हूँ। मालवीय जी की अनेक रचनाएं मैंने पहले भी शेयर की हैं। लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय उमाकांत मालवीय जी का यह नवगीत- रातें लम्बी हुईंदिन बौने हो गए । ठिगने कद वाले दिनलम्बी परछाइयाँधूप की इकाई…

  • 12th Nov 2025

    पहचान ले के आए हैं!

    हम अपने-आप की पहचान ले के आए हैं,नए सुख़न नए इम्कान ले के आए हैं| मंज़र भोपाली

  • 12th Nov 2025

    रात की महफ़िल!

    ख़त्म हुई सब रात की महफ़िल,एक पर-एक-परवाना पड़ा है| कैफ़ भोपाली

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