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देखें सितम की इंतिहा क्या है!
उन्हें ये फ़िक्र है हर दम नई तर्ज़-ए-जफ़ा क्या है, हमें ये शौक़ है देखें सितम की इंतिहा क्या है| चकबस्त बृज नारायण
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स्त्री!
आज हिन्दी के एक वरिष्ठ कवि स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की एक कविता शेयर कर रहा हूँ| इस कविता में उन्होंने स्त्री को लेकर कुछ अलग प्रकार की अभिव्यक्ति की है| लीजिए आज प्रस्तुत है स्वर्गीय शलभ श्रीराम सिंह जी की यह कविता – एक हँसी का नाम है स्त्रीस्त्री एक रुलाई का नाम…
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हवा दिल में ख़्वाहिश जगाने लगी!
बदन पर नई फ़स्ल आने लगी, हवा दिल में ख़्वाहिश जगाने लगी| आदिल मंसूरी
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बिखर रहे हैं पुरानी किताब के!
किस तरह जम्अ’ कीजिए अब अपने आप को, काग़ज़ बिखर रहे हैं पुरानी किताब के| आदिल मंसूरी
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रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब के!
बस तिश्नगी की आँख से देखा करो उन्हें, दरिया रवाँ-दवाँ हैं चमकते सराब* के|*मृगतृष्णा आदिल मंसूरी
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आँख में जाले थे ख़्वाब के!
सोए तो दिल में एक जहाँ जागने लगा, जागे तो अपनी आँख में जाले थे ख़्वाब के| आदिल मंसूरी